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सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को राष्ट्रपुत्र मानने की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को राष्ट्रपुत्र घोषित करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता को नकारात्मक बताते हुए सख्त टिप्पणी की और चेतावनी दी कि यदि यह सिलसिला जारी रहा, तो भविष्य में याचिकाकर्ता को कोर्ट में आने से रोका जा सकता है। याचिकाकर्ता ने नेताजी की जयंती को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने और अन्य मांगें की थीं। जानें पूरी कहानी में और क्या हुआ।
 

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को नकारात्मक बताया

सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को राष्ट्रपुत्र घोषित करने और आजाद हिंद फौज को भारत की स्वतंत्रता का श्रेय देने की मांग वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को नकारात्मक बताते हुए सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि यह सिलसिला जारी रहा, तो याचिकाकर्ता को भविष्य में सुप्रीम कोर्ट में आने से रोका जा सकता है।


पिछली याचिका भी हुई थी खारिज

याचिकाकर्ता पिनाकपानी मोहंती ने इससे पहले 2024 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु की जांच की मांग करते हुए एक याचिका दायर की थी। उस समय, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने याचिकाकर्ता के इरादों पर सवाल उठाए थे।


याचिकाकर्ता की मांगें

  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस को राष्ट्रीय पुत्र के रूप में मान्यता दी जाए।
  • भारतीय राष्ट्रीय सेना के स्थापना दिवस 21 अक्टूबर, 1943 को राष्ट्रीय दिवस घोषित किया जाए।
  • नेताजी की जयंती 23 जनवरी 1897 को राष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाए। उनके जन्मस्थान (कटक, ओडिशा) को राष्ट्रीय संग्रहालय बनाया जाए।
  • आजादी का श्रेय उन क्रांतिकारियों को दिया जाए जिन्होंने अहिंसा का पालन नहीं किया, और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व वाली कठअ को भी।
  • 1947 में भारत की आजादी से जुड़ी असल सच्चाई वाली रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।
  • 1946-1947 के दौरान भारतीय सैनिकों और आम नागरिकों के विद्रोह की रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जाए।
  • नीरा आर्य को राष्ट्र-पुत्री घोषित किया जाए।