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सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को दी अग्रिम जमानत, जांच में सहयोग की शर्त

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत प्रदान की है, जिससे उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा मिली है। इस फैसले के बाद, असम के मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। पवन खेड़ा पर आरोप है कि उन्होंने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी के पास विदेशी पासपोर्ट और एक बड़ी कंपनी के संबंध में गंभीर आरोप लगाए थे। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं।
 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला


सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत प्रदान की है, जिससे उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा मिली है। इससे पहले, कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका पर निर्णय सुरक्षित रखा था। पवन खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें पेश कीं, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी गिरफ्तारी की कोई आवश्यकता नहीं है।


पुलिस की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया

कोर्ट के निर्णय के बाद, कांग्रेस के जयराम रमेश और अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि 60 पुलिसकर्मियों को खेड़ा के निवास पर भेजा गया था, जिसका उद्देश्य केवल डराना और उत्पीड़न करना था। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री का उल्लेख करते हुए कई महत्वपूर्ण बातें की हैं।


उन्होंने यह भी कहा कि असम के मुख्यमंत्री को यह विचार करना चाहिए कि क्या एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह की कार्रवाई शोभा देती है।


मामले का विवरण

यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास तीन विदेशी पासपोर्ट और अमेरिका में 50,000 करोड़ की कंपनी होने के आरोप से संबंधित है। पवन खेड़ा ने 5 अप्रैल को दिल्ली और गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ये आरोप लगाए थे, जिसके बाद रिनिकी भुइयां सरमा ने उनके खिलाफ गुवाहाटी में एफआईआर दर्ज कराई।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरोप-प्रत्यारोप राजनीति से प्रभावित प्रतीत होते हैं, लेकिन पवन खेड़ा को असम पुलिस की जांच में सहयोग करना होगा और उन्हें बिना अदालत की अनुमति के भारत नहीं छोड़ने की शर्त रखी गई है।


असम सीएम की प्रतिक्रिया

कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद, असम के मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें किसी से भी लोकतंत्र पर सबक सीखने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में असली मुद्दा एक महिला की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर उछालना है, जिसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है।


उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अदालतें जल्द ही इस मामले पर संज्ञान लेंगी और चुनावी परिणामों को प्रभावित करने के लिए झूठे दस्तावेजों का उपयोग करने वालों को सजा मिलेगी।