सुप्रीम कोर्ट ने प्रियंका त्यागी को स्थायी कमीशन देने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
भारतीय तटरक्षक बल (ICG) को सुप्रीम कोर्ट ने शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी प्रियंका त्यागी को स्थायी कमीशन देने के लिए कहा है। यदि तटरक्षक बल ऐसा नहीं करता है, तो अदालत स्वयं उचित आदेश जारी करेगी। यह निर्देश चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी के समक्ष दिया।
प्रियंका त्यागी की याचिका
प्रियंका त्यागी ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें उन्हें सेवा जारी रखने की अंतरिम राहत नहीं दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में उनकी याचिका को हाई कोर्ट से अपने पास ट्रांसफर कर लिया और उन्हें दिसंबर 2023 में रिटायरमेंट से पहले के पद पर सेवा जारी रखने की अनुमति दी।
तटरक्षक बल का रुख
अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने बताया कि तटरक्षक बल और नौसेना में अंतर है। उन्होंने कहा कि नए जहाजों के आगमन से अधिक पुरुष और महिला अधिकारियों को शामिल करना संभव हो रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता 2023 में सेवा छोड़ चुकी हैं, लेकिन विभाग उनकी नियुक्ति पर विचार करेगा।
जजों के सवाल
मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि जब पुरुष अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया जा रहा है, तो महिलाओं को क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि नीति का अभाव बहाना नहीं हो सकता। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह लिंग भेद का मामला नहीं है, लेकिन कोर्ट इससे सहमत नहीं हुआ। जस्टिस बागची ने कहा कि प्रियंका त्यागी को उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने भी सिफारिश की थी।
कोर्ट का निर्णय
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यदि तटरक्षक बल स्वयं प्रियंका त्यागी को समायोजित कर ले, तो ठीक है, अन्यथा अदालत आदेश देगी। उन्होंने कहा कि प्रियंका त्यागी योग्य अधिकारियों में सबसे सीनियर हैं और उन्हें अपमानित नहीं होने दिया जा सकता।
स्थायी कमीशन का विवाद
प्रियंका त्यागी को 2009 में असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने स्थायी कमीशन के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग ने कहा कि महिलाओं के लिए ऐसी व्यवस्था नहीं है। 2023 में उनकी सेवा समाप्त कर दी गई, जिसके खिलाफ उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
विवाद की शुरुआत
यह विवाद 2009 से शुरू हुआ। प्रियंका त्यागी ने कोस्ट गार्ड में शॉर्ट सर्विस अपॉइंटमेंट के तहत 14 साल से अधिक समय तक सेवाएं दीं। उन्होंने समुद्र की निगरानी की, लेकिन कोस्ट गार्ड ने महिला होने के कारण स्थायी कमीशन देने से इनकार कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की अपेक्षाएँ
सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि रक्षा सेवाओं में लैंगिक समानता को बढ़ावा दिया जाए। कोर्ट ने कोस्ट गार्ड को प्रियंका त्यागी को पुनः उसी पद पर बहाल करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि पुरुष अधिकारी स्थायी कमीशन प्राप्त कर सकते हैं, तो महिलाओं को क्यों नहीं?
महिलाओं के लिए स्थायी कमीशन का अभाव
एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि तटरक्षक बल में महिलाओं के लिए स्थायी कमीशन की व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने बताया कि महिलाओं के लिए सुविधाएं सीमित थीं और उन्हें लंबे समय तक समुद्र में रहना पड़ता था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद तटरक्षक विभाग की प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है।