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सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 की वैधता पर दी महत्वपूर्ण टिप्पणी, विपक्ष ने उठाई चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 की वैधता पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है, जिससे चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद बढ़ गया है। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। इस मामले में अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का क्या असर होगा।
 

विपक्ष की मांग और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने SIR मुद्दे पर सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने वोटर लिस्ट में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए उपयोग किए जाने वाले फॉर्म-6 के संदर्भ में चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट के बीच चल रही बहस में यह स्पष्ट किया कि उसने नए फॉर्म-6 की वैधता पर कोई निर्णय नहीं लिया है।


सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'अदालत की टिप्पणियों को संवैधानिक न्यायिक निर्णय नहीं माना जा सकता। नए फॉर्म-6 पर कोई निर्णय नहीं हुआ है। कृपया हमारे शब्दों को गलत तरीके से न समझें।' इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।


मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद चुनाव आयोग द्वारा 26 सितंबर को जारी एक प्रेस नोट के बाद बढ़ा। आयोग ने कहा था कि बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से संबंधित मई 2026 के निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 के साथ जोड़े गए अतिरिक्त घोषणा-पत्र को बरकरार रखा था। इसके बाद फॉर्म में किए गए परिवर्तनों की वैधता पर सवाल उठने लगे।


फॉर्म-6 का विवाद

फॉर्म-6 वह दस्तावेज है जिसके माध्यम से नए मतदाताओं को वोटर लिस्ट में जोड़ा जाता है। विवाद का मुख्य कारण इसी फॉर्म के साथ जोड़ा गया एक घोषणा पत्र है। हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने इसी घोषणा पत्र पर टिप्पणी की थी। इस फॉर्म में नए मतदाता को रजिस्ट्रेशन के समय यह बताने के लिए कहा गया है कि क्या उसका नाम या उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR के दौरान तैयार की गई मतदाता सूची में था। इस अतिरिक्त फॉर्म के कारण ही विवाद उत्पन्न हुआ है और चुनाव आयोग पर आरोप है कि उन्होंने नियमों का पालन किए बिना यह बदलाव किया है।


चुनाव आयोग के भीतर मतभेद

विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग ने संसद की मंजूरी के बिना ही फॉर्म-6 में अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा। वहीं, एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस मुद्दे पर चुनाव आयोग के भीतर भी मतभेद हैं। बताया गया है कि चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने इस बदलाव पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि फॉर्म-6 के नियम पहले से निर्धारित हैं, इसलिए उसमें बदलाव करने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। केवल ऑनलाइन फॉर्म में नई शर्त जोड़कर नियम नहीं बदले जा सकते।


चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण

चुनाव आयोग का कहना है कि उसने मूल फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया है, बल्कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा था। अब सुप्रीम कोर्ट यह जांच करेगा कि क्या चुनाव आयोग को ऐसा करने का कानूनी अधिकार था। इस मामले पर अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को होगी।