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सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की याचिका को खारिज कर दिया है। इस मामले में सुनवाई के दौरान वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कई दलीलें पेश कीं, लेकिन कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को चुनावी याचिका हाईकोर्ट में दाखिल करनी होगी। जानें इस मामले में क्या हुआ और आगे की प्रक्रिया क्या होगी।
 

सुप्रीम कोर्ट में मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर सुनवाई

नई दिल्ली - मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र को रद्द करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस चंदूरकर की बेंच ने सुनवाई की। हालांकि, मीनाक्षी नटराजन को इस मामले में राहत नहीं मिली और सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता चुनावी याचिका हाईकोर्ट में दाखिल कर सकते हैं।


मीनाक्षी नटराजन की ओर से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि एक निजी शिकायत पर नोटिस जारी किया गया है। जस्टिस प्रशांत मिश्रा ने कहा कि मजिस्ट्रेट कोर्ट ने शिकायत में कुछ वजन देखकर ही समन जारी किया होगा। सिंघवी ने कहा कि यह एक निजी शिकायत है, जिसमें कोई संज्ञान नहीं लिया गया है। आरपी एक्ट के अनुसार, आरोप तय होना आवश्यक है, लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ है।


सिंघवी ने यह भी कहा कि यदि रिटर्निंग ऑफिसर मनमाने तरीके से कार्य करता है, जिससे किसी एक पार्टी को लाभ होता है, तो कोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि जिस शिकायत में मीनाक्षी नटराजन का नाम है, वह उस समय की है जब वह तेलंगाना की प्रभारी नहीं थीं।


सिंघवी ने कहा कि यदि कोई आरोप तय नहीं हुआ है, तो उन्हें इसकी जानकारी क्यों देनी चाहिए? उन्होंने चुनाव आयोग की चुप्पी पर भी सवाल उठाया और कहा कि यह निंदनीय है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के बजाय इसे खत्म किया गया है।


जस्टिस मिश्रा ने कहा कि उन्हें कोई ऐसा जजमेंट दिखाएं जिसमें आरओ द्वारा नामांकन रद्द होने के बाद कोर्ट ने हस्तक्षेप किया हो। उन्होंने कहा कि यदि एक बार नामांकन रद्द हो जाए, तो चुनावी याचिका ही एकमात्र विकल्प है।


चुनाव आयोग ने कहा कि याचिकाकर्ता का कहना है कि आरओ ने आदेश पारित किया और आयोग ने हस्तक्षेप नहीं किया। आयोग ने यह भी कहा कि यदि उम्मीदवारों की संख्या सीटों से कम है, तो परिणाम तुरंत घोषित किया जा सकता है।


महेश केवट के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि 2018 के संशोधन के बाद यह स्पष्ट है कि सभी पेंडिंग केसों की जानकारी देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं हुआ है।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले यह तय किया जाएगा कि याचिका मेंटेनेबल है या नहीं।