सुप्रीम कोर्ट ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने के फैसले पर रोक लगाने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
नई दिल्ली। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने यूपीआई के माध्यम से होने वाले लेनदेन पर शुल्क लगाने के केंद्र सरकार के निर्णय को रोकने से मना कर दिया है। हालांकि, अदालत ने सरकार को नोटिस जारी किया है और पूछा है कि नए शुल्क नियम को लागू करने का आधार क्या है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने यूपीआई के जरिए दो हजार रुपए से अधिक के लेनदेन पर 0.40 प्रतिशत शुल्क लगाने का निर्णय लिया है, जो 15 अक्टूबर से प्रभावी होगा।
जनहित याचिका और सुनवाई
इस मामले में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने सुनवाई की। वकील अंजन दत्ता द्वारा दायर की गई इस याचिका में सरकार के निर्णय पर रोक लगाने की मांग की गई थी। अदालत ने इस पर रोक लगाने से इनकार करते हुए सरकार को नोटिस जारी किया।
याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि दो हजार रुपए की सीमा कैसे तय की गई है? इसके साथ ही यह भी पूछा गया है कि यूपीआई और रूपे कार्ड के लिए नियम अलग क्यों हैं? याचिका में इस निर्णय को रद्द करने की मांग की गई है। अंजन दत्ता ने यह भी कहा कि सरकार ने जनता से चर्चा किए बिना और ठोस नियम बनाए बिना यह शुल्क तय किया है।
सरकार का पक्ष
सोमवार की सुनवाई में सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसीटर जनरल एन वेंकटरमण ने कहा कि आम लोगों के बीच पैसे भेजने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश के लगभग 96 प्रतिशत छोटे भुगतानों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सरकार ने यह भी बताया कि 0.40 प्रतिशत का शुल्क ग्राहकों को नहीं, बल्कि दुकानदारों को देना होगा।