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सुप्रीम कोर्ट ने यूपीआई शुल्क पर रोक लगाने से किया इनकार, नोटिस जारी

सुप्रीम कोर्ट ने यूपीआई के व्यापारी भुगतानों पर शुल्क लगाने के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर तुरंत रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। नए नियमों के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से कुछ लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। छोटे व्यापारियों को राहत देने के लिए विशेष छूट भी दी गई है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और आगे की सुनवाई के बारे में।
 

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

नई दिल्ली - यूपीआई के कुछ व्यापारी भुगतानों पर शुल्क लगाने के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तुरंत रोक लगाने से मना कर दिया। हालांकि, अदालत ने केंद्र सरकार, यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है।


याचिका का विवरण

याचिका में 2,000 रुपये से अधिक के कुछ 'पर्सन-टू-मर्चेंट' यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) की वैधता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि शुल्क व्यवस्था में बदलाव बिना पर्याप्त कानूनी सुरक्षा, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के किया गया है।


नए प्रावधानों की जानकारी

एनपीसीआई के नए नियमों के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से कुछ व्यापारिक यूपीआई भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन निर्धारित की गई है। यह शुल्क ग्राहक से नहीं, बल्कि व्यापारी से लिया जाएगा।


छोटे व्यापारियों के लिए राहत

नई व्यवस्था में छोटे व्यापारियों के लिए विशेष छूट का प्रावधान है। हर महीने यूपीआई के माध्यम से 1 लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को एमडीआर से छूट मिलेगी, जिससे छोटे दुकानदारों पर अतिरिक्त शुल्क का प्रभाव सीमित रहेगा।


विशेष क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क

रेलवे, ईंधन, दूरसंचार, बीमा और कृषि इनपुट जैसे कुछ क्षेत्रों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 5 रुपये का निश्चित शुल्क निर्धारित किया गया है। यह प्रावधान बड़े व्यापारिक भुगतानों पर शुल्क लागू करते हुए छोटे और रोजमर्रा के डिजिटल भुगतानों को शुल्क से मुक्त रखने के लिए है।


आगे की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल 15 अक्टूबर से प्रस्तावित नई एमडीआर व्यवस्था पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है। अदालत द्वारा नोटिस जारी करने के बाद केंद्र सरकार, एनपीसीआई और अन्य संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखना होगा, जिसके बाद अदालत मामले की आगे की सुनवाई करेगी।