सुप्रीम कोर्ट ने रेप पीड़िताओं की पहचान उजागर करने पर कड़ी चेतावनी दी
सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के मामलों में पीड़िताओं की पहचान को उजागर करने पर कड़ी आपत्ति जताई है। अदालत ने सभी उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया है कि वे सुनिश्चित करें कि किसी भी आदेश में पीड़िता या उसके परिवार के सदस्यों का नाम न बताया जाए। अदालत ने निपुण सक्सेना मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि 2018 में यह स्पष्ट किया गया था कि कोई भी व्यक्ति प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या सोशल मीडिया पर पीड़िता का नाम प्रकाशित नहीं कर सकता और न ही ऐसी जानकारी साझा कर सकता है जिससे उसकी पहचान उजागर हो।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि इस आदेश का पालन न होना गंभीर चूक को दर्शाता है और यह भी बताता है कि समाज में ऐसे अपराधों के बाद लगने वाले कलंक के प्रति संवेदनशीलता की कमी है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बताया कि 1983 में भारतीय दंड संहिता में एक प्रावधान जोड़ा गया था, जिसका उद्देश्य धारा 376 के तहत पीड़िता की पहचान की सुरक्षा करना है। यह संशोधन यौन अपराधों में पीड़िता की पहचान को सार्वजनिक होने से रोकने के लिए किया गया था।
अदालत ने निर्देश दिया कि इस फैसले की प्रति सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल को भेजी जाए, ताकि इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके। यह टिप्पणी हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के एक आदेश को रद्द करते हुए की गई, जिसमें 9 साल की बच्ची के साथ बलात्कार के मामले में सजा को पलट दिया गया था।