सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की जमानत रद्द की
जमानत रद्द करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने ठाणे के सिविल अस्पताल में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के साथ मारपीट के मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की जमानत को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया है कि वे तीन दिन के भीतर आत्मसमर्पण करें। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह संदेश जाना चाहिए कि मेडिकल समुदाय को किसी भी प्रकार से नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता।
कोर्ट का सख्त रुख
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट के जमानत आदेश पर रोक लगा दी। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों के साथ होने वाली हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा, 'यह स्पष्ट होना चाहिए कि मेडिकल क्षेत्र के लोगों पर हमला नहीं किया जा सकता।' उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोग हमारी सेवा में लगे रहते हैं।
मामले का विवरण
रमेश म्हात्रे पर कल्याण-डोंबिवली नगर निगम के शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों के साथ मारपीट का आरोप है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ उन्हें जमानत दी थी, जिसे महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। रमेश के वकील ने कोर्ट में कहा कि यह मामला मजिस्ट्रेट ट्रायल का है, जिसमें अधिकतम सजा पांच साल है।
वकील का तर्क
रमेश के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि आरोपी पहले भी हिरासत में रह चुका है और जांच में सहयोग कर रहा है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार कर दिया। पीठ ने राज्य सरकार के द्वारा प्रस्तुत किए गए रमेश के आपराधिक रिकॉर्ड की जांच करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों और अस्पताल कर्मियों पर होने वाले हमलों को सामान्य कानून-व्यवस्था का मामला मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।