सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और रणवीर अल्लाहबादिया पर लगाया जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में कड़ी नाराजगी
नई दिल्ली। कॉमेडियन समय रैना और यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया से संबंधित मामले की सुनवाई मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई। इस दौरान अदालत ने दोनों के द्वारा पूर्व में दिए गए आदेशों का पालन न करने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। कोर्ट ने प्रत्येक पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में राशि जमा नहीं की गई, तो सख्त कदम उठाए जाएंगे। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जो लोग खुद को युवाओं का आदर्श मानते हैं, उनसे जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाती है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि 'ये खुद को 'यूथ आइकॉन' कहते हैं। मुझे नहीं पता कि वह किस तरह का यूथ आइकॉन है। यह सोचकर ही मुझे घबराहट होती है।'
बेंच ने कहा कि पिछली सुनवाई में जो भरोसा दिया गया था, उसके अनुसार कार्रवाई नहीं दिखाई दी। अदालत ने यह माना कि रिकॉर्ड पर दर्ज आश्वासनों और वास्तविकता में अंतर है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि समय रैना अपने शो लगातार कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट के निर्देशों के बावजूद उन्होंने न तो एसएमए फाउंडेशन से संपर्क किया और न ही उन लोगों से माफी या संवाद की पहल की, जिनकी भावनाएं आहत हुई थीं।
इस पर अदालत ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में सम्मान उसी व्यक्ति को मिलता है, जो दूसरों का सम्मान करना जानता हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि अब तक दोनों को कई अवसर दिए गए हैं, लेकिन उनके व्यवहार से ऐसा प्रतीत होता है कि लोगों का मजाक उड़ाना एक चलन बन गया है। वहीं, समय रैना की ओर से पेश वकील ने अदालत में कहा कि एसएमए फाउंडेशन से संपर्क न हो पाने के पीछे किसी तरह का अहंकार नहीं था। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे अपने मुवक्किल को अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन करने के लिए समझाएंगे।
गौरतलब है कि यह मामला पिछले वर्ष प्रसारित हुए शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' से जुड़ा है। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान विकलांगता और दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों से पीड़ित लोगों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना और अन्य संबंधित लोगों को बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश दिया था। साथ ही चेतावनी दी थी कि इस तरह की सामग्री सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत दंडनीय हो सकती है। फिलहाल मामले की सुनवाई जारी है।