सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुनवाई तेज करने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का मामला
सुप्रीम कोर्ट में सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों के त्वरित निपटारे की मांग को लेकर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया ने एफिडेविट पेश किया, जिसमें बताया गया कि लोकसभा के 543 सदस्यों में से 251 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। राज्यसभा के 233 सदस्यों में से 75 के खिलाफ भी मामले हैं।
आपराधिक मामलों की संख्या
देशभर में सांसदों और विधायकों के खिलाफ 4,000 से अधिक आपराधिक मामले लंबित हैं। 28 राज्यों में से 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अपने खिलाफ आपराधिक मामलों का खुलासा किया है, जिनमें गंभीर मामले शामिल हैं। विजय हंसारिया ने इस याचिका में कोर्ट की सहायता की है।
तेलंगाना के सीएम पर सबसे ज्यादा मामले
एफिडेविट में उल्लेख किया गया है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर 89 मामले दर्ज हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी पर 29 और कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार पर 19 मामले हैं। हंसारिया ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट मामलों की निगरानी कर रहे हैं, लेकिन 2018 से सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है।
लोकसभा में आपराधिक मामलों का विवरण
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा में 543 सदस्यों में से 251 पर आपराधिक मामले हैं, जिनमें से 170 गंभीर हैं। राज्यसभा में 233 में से 75 सदस्यों पर आपराधिक मामले हैं, जिनमें 40 गंभीर मामले शामिल हैं।
केरलम में सांसदों की स्थिति
सेन्हा कलिता द्वारा दाखिल हलफनामे के अनुसार, केरलम के 20 में से 19 सांसदों पर आपराधिक आरोप हैं। तेलंगाना में 17 में से 14 सांसदों पर मामले हैं। ओडिशा में 21 में से 16, झारखंड में 14 में से 10 और तमिलनाडु में 39 में से 26 सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
अन्य राज्यों में स्थिति
हरियाणा के 10 सांसदों में से एक और छत्तीसगढ़ के 11 सांसदों में से एक पर आपराधिक आरोप हैं। पंजाब में 13 में से 2, असम में 14 में से 3, दिल्ली में 7 में से 3, राजस्थान में 25 में से 4, गुजरात में 25 में से 5 और मध्य प्रदेश में 29 में से 9 सांसदों पर आपराधिक मामले हैं।
कोर्ट की कार्रवाई
9 नवंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ 5,000 से अधिक आपराधिक मामलों की सुनवाई को तेज करने के लिए हाईकोर्ट को विशेष बेंच बनाने का निर्देश दिया।