सुप्रीम कोर्ट ने सुखना झील के संरक्षण पर हरियाणा सरकार को दी चेतावनी
सुखना झील की स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
नई दिल्ली: अरावली पहाड़ियों के संरक्षण से संबंधित एक मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ की पहचान मानी जाने वाली ऐतिहासिक सुखना झील की गंभीर स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। सर्वोच्च अदालत ने झील के सूखने और उसके अस्तित्व पर खतरे के लिए अवैध निर्माण को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों और बिल्डर माफिया के गठजोड़ ने इस प्राकृतिक धरोहर को नष्ट कर दिया है।
सीजेआई सूर्यकांत की कड़ी फटकार
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई में सुनवाई के दौरान, पीठ ने हरियाणा सरकार को आड़े हाथों लिया। सीजेआई ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि राज्य के अधिकारियों और बिल्डर माफिया की मिलीभगत के कारण आप सुखना झील को और कितना सुखा देंगे? अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आपने अपने स्वार्थों के चलते इस झील को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। यह टिप्पणी अवैध निर्माण और अनियंत्रित शहरीकरण के कारण पर्यावरण को हो रहे नुकसान की गंभीरता को दर्शाती है।
पुरानी गलतियों से सबक लेने की सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार को सख्त चेतावनी दी कि वह अपनी पिछली गलतियों को न दोहराए। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुखना झील के जलग्रहण क्षेत्रों में हुए अवैध निर्माण ने झील के प्राकृतिक स्वरूप को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। सीजेआई ने जोर देकर कहा कि अब ठोस और कड़े कदम उठाने का समय आ गया है। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि अधिकारियों और बिल्डरों के बीच यह 'नेक्सस' ऐसे ही चलता रहा, तो बचे-खुचे पर्यावरण का भी नाश हो जाएगा। यह टिप्पणी प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार पर एक बड़ा प्रहार मानी जा रही है।