सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों को वापस लेने की अनुमति दी
सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
बुधवार को, सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के पूर्व और वर्तमान सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ दर्ज 65 आपराधिक मामलों को वापस लेने की राज्य सरकार की याचिका को मंजूरी दे दी। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता में पीठ ने यह पाया कि इन मामलों में से कोई भी गंभीर अपराध की श्रेणी में नहीं आता और आरोपी आदतन अपराधी नहीं हैं।
महामारी के दौरान दर्ज मामले
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इन 65 मामलों का विश्लेषण करते हुए बताया कि ये सभी कोविड-19 महामारी के दौरान के हैं। यह एक असाधारण स्थिति थी, जिसमें जनता और उनके प्रतिनिधि कई समस्याओं का सामना कर रहे थे। इन मामलों में संक्रमण फैलाने, बिना हिंसा के धरना-प्रदर्शन करने और आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत पुतला दहन जैसी धाराएं शामिल थीं।
2021 के ऐतिहासिक आदेश का संदर्भ
अदालत ने 10 अगस्त 2021 के अपने ऐतिहासिक आदेश का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मामलों को वापस लेने के लिए संबंधित उच्च न्यायालय की पूर्व अनुमति आवश्यक है। इस नियम का उद्देश्य दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 321 का दुरुपयोग रोकना और जनहित को प्राथमिकता देना है।
संसाधनों की बचत
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इन मामलों को आगे बढ़ाने से न्याय व्यवस्था का कोई लाभ नहीं होगा, बल्कि इससे अधिक गंभीर मामलों की सुनवाई में देरी होगी। राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में दिए गए आवेदन में कहा था कि लोक अभियोजकों और जिला सरकारी वकीलों से परामर्श के बाद व्यापक जनहित को ध्यान में रखते हुए मुकदमों को वापस लेने का निर्णय लिया गया था।