☰
×

सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत का मजेदार जवाब: विरोध प्रदर्शन की सलाह दी

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हाल ही में एक याचिका पर सुनवाई के दौरान मजेदार टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने याचिकाकर्ता को विरोध प्रदर्शन करने की सलाह दी। यह मामला उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की एक विधानसभा सीट से जुड़ा है, जहां आरक्षण में बदलाव की मांग की गई है। CJI ने कहा कि यह मुद्दा अदालत का नहीं, बल्कि विधायिका का है। जानें इस दिलचस्प सुनवाई के बारे में और क्या कहा गया।
 

मुख्य न्यायाधीश का हल्का-फुल्का अंदाज


नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हाल ही में देश में चल रहे प्रदर्शनों पर एक मजेदार टिप्पणी की। लोकसभा और विधानसभा सीटों पर आरक्षण में बदलाव की मांग करने वाली एक याचिका की सुनवाई के दौरान, CJI ने याचिकाकर्ता से पूछा कि वह कोर्ट क्यों आए हैं, जबकि वह विरोध प्रदर्शन कर सकते थे। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने भी चुटकी लेते हुए कहा कि उनका विरोध करने का कोई इरादा नहीं है, क्योंकि याचिकाकर्ता की तबीयत ठीक नहीं है।


याचिका का संदर्भ

यह मामला उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की 191 कादीपुर विधानसभा सीट से संबंधित है। एक मतदाता ने याचिका दायर की है जिसमें कहा गया है कि 1952 से यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है और इसमें बदलाव की आवश्यकता है। याचिकाकर्ता का कहना है कि पिछले सात दशकों से केवल SC समुदाय के लोग ही इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे केवल कुछ परिवारों को राजनीतिक लाभ मिला है।


CJI सूर्यकांत, जस्टिस वी. मोहना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई की। CJI ने मजाक में कहा, "आप गलत नंबर डायल कर रहे हैं। यह तो विरोध प्रदर्शनों का समय है। शायद आपको भी ऐसा ही करना चाहिए।"


याचिकाकर्ता का तर्क

याचिकाकर्ता ने यह तर्क दिया कि रोटेशन प्रणाली का न होना संविधान के आर्टिकल 14, 15 और 19 का उल्लंघन है। इससे मतदाताओं के पास विकल्प सीमित हो जाते हैं, क्योंकि केवल SC समुदाय के उम्मीदवार ही चुनाव में भाग लेते हैं। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि यह तर्क इस धारणा पर आधारित है कि बहुसंख्यक समुदाय जाति के आधार पर वोट देगा, जो जरूरी नहीं है। अदालत लोकतांत्रिक विकल्पों पर कोई निर्णय नहीं दे सकती। यह मतदाताओं का काम है।


उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी समाज से उम्मीदवार होने से वोट देने के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता। कोई भी व्यक्ति किसी भी क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए स्वतंत्र है।


अदालत की भूमिका

याचिकाकर्ता ने कहा कि नगर पालिकाओं और पंचायतों में रोटेशन प्रणाली लागू है, इसलिए इसे लोकसभा और विधानसभा में भी लागू किया जाना चाहिए। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि स्थानीय निकायों के चुनाव संविधान के अलग ढांचे के तहत होते हैं। अदालत इस मुद्दे पर संवैधानिक प्रावधानों को फिर से नहीं लिख सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत संसद के तीसरे सदन की भूमिका नहीं निभा सकती। यह विधायिका का काम है।


CJI ने कहा, "आप गलत जगह आए हैं। आजकल तो विरोध प्रदर्शनों का दौर चल रहा है। शायद आपको भी वहीं जाना चाहिए।" वकील के जवाब पर CJI ने कहा कि आप अपनी आवाज उठा सकते हैं और इस मुद्दे पर संसद में फिर से विचार करने का समय आ गया है, लेकिन यह काम केवल विधायिका ही कर सकती है।