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सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर प्रक्रिया पर सुनवाई, नागरिकता वेरिफिकेशन का अधिकार चुनाव आयोग के पास

सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई हुई। वकील राकेश द्विवेदी ने बताया कि एसआईआर का उद्देश्य केवल नागरिकता की पुष्टि करना है, न कि किसी को देश से बाहर निकालना। उन्होंने कहा कि यह अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। सुनवाई के दौरान चुनाव की निष्पक्षता और विपक्ष के सवालों पर भी चर्चा हुई। जानें इस महत्वपूर्ण मामले के बारे में और क्या कहा गया।
 

एसआईआर प्रक्रिया की कानूनी स्थिति


नई दिल्ली: मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई हुई। इस मामले में चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि एसआईआर का उद्देश्य केवल यह निर्धारित करना है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल होने के लिए योग्य है या नहीं। यह प्रक्रिया केवल नागरिकता की पुष्टि के लिए होती है।


केंद्र सरकार का अधिकार

द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि एसआईआर के माध्यम से किसी को देश से बाहर नहीं निकाला जा सकता, क्योंकि यह अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। उन्होंने संविधान सभा की चर्चाओं और सरबानंद सोनोवाल मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में नागरिकता की जांच आवश्यक है।


चुनाव की निष्पक्षता पर प्रभाव

उन्होंने बताया कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन आॅफिसर केवल वोटर लिस्ट से संबंधित निर्णय ले सकते हैं। संदिग्ध गैर-नागरिकों को वोट देने की अनुमति देना चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने सवाल उठाए। जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि भारतीय नागरिकता की प्रक्रिया पहले से ही सख्त है।


विपक्ष के सवाल

बिहार, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं और कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में चुनाव आयोग की शक्तियों, नागरिकता की पहचान और वोट देने के अधिकार से संबंधित मुद्दे उठाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में एसआईआर से संबंधित चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को चुनौती देने वाली तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की याचिकाओं पर आयोग से जवाब मांगा है।