सुप्रीम कोर्ट में केस लिस्टिंग प्रक्रिया में सुधार: नई याचिकाएँ होंगी स्वतः लिस्ट
सुप्रीम कोर्ट की नई लिस्टिंग प्रणाली
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तेज़ बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। CJI ने सुप्रीम कोर्ट में मामलों की लिस्टिंग प्रणाली में व्यापक बदलाव की घोषणा की है, जो 1 दिसंबर से लागू होगी। इस नई व्यवस्था के तहत सभी नई याचिकाएँ अपने आप लिस्ट होंगी, जिससे वकीलों और पक्षकारों को कोर्ट में 'मेंशनिंग' करने की आवश्यकता लगभग समाप्त हो जाएगी।
प्रमुख बदलावों की जानकारी
व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों को प्राथमिकता
व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित मामलों, जैसे कि तत्काल अंतरिम राहत की मांग करने वाली याचिकाएँ, को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। इन मामलों में, त्रुटियाँ दूर होने और सत्यापन पूर्ण होने के बाद, मामले दो कार्य-दिवसों के भीतर सूचीबद्ध कर दिए जाएंगे।
जमानत याचिकाओं के त्वरित निपटान के लिए नई प्रक्रिया
जमानत से जुड़ी याचिकाओं के शीघ्र निस्तारण के लिए, याचिकाकर्ता को संबंधित नोडल अधिकारी या स्टैंडिंग काउंसिल को अग्रिम प्रति उपलब्ध करानी होगी। इससे सुनवाई प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
अत्यावश्यक मामलों के लिए विशेष समय-खिड़की
ऐसे मामलों, जिन्हें निर्धारित तिथि तक प्रतीक्षा नहीं कराया जा सकता, जैसे अग्रिम जमानत, मृत्यु-दंड, हैबियस कॉर्पस, बेदखली/उजाड़ने या ढहाने से जुड़े मामले, उन्हें सुबह 10:00 बजे से 10:30 बजे के बीच मेंशन किया जा सकेगा।
सीनियर काउंसिल को मौखिक मेंशनिंग की अनुमति नहीं
अब सीनियर काउंसिल को मौखिक मेंशनिंग की अनुमति नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट युवा वकीलों को अवसर देने के लिए जूनियर वकीलों को मेंशनिंग करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।
पुराने मामलों के लिए स्थगन-पत्र नहीं मानें जाएंगे
लंबे समय से लंबित नियमित सुनवाई वाले मामलों के निस्तारण में तेजी लाने के लिए, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में स्थगन-पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था से कोर्ट में रोज़ाना की भीड़भाड़ और मेंशनिंग की अनिश्चितता में कमी आएगी। इससे आम litigants को भी राहत मिलेगी, जो अपने मामलों की लिस्टिंग के लिए लंबे समय तक इंतजार करने को मजबूर रहते थे।