सुप्रीम कोर्ट में छात्र आंदोलन से जुड़े FIR पर केंद्र का आवेदन
केंद्र सरकार का सुप्रीम कोर्ट में आवेदन
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन से संबंधित FIR के मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन प्रस्तुत किया है। सरकार ने अदालत से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का उपयोग करने की मांग की है। सोमवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया और मंगलवार को सुनवाई की गुहार लगाई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
सुनवाई की आवश्यकता पर चर्चा
तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि सरकार छात्र प्रदर्शन से संबंधित मामले में आवेदन दाखिल करने जा रही है और इसे जल्द सुनने का अनुरोध किया। चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने पूछा कि क्या तत्काल सुनवाई आवश्यक है। मेहता ने कहा कि पक्षकारों के बीच समाधान की संभावना बन रही है। अदालत ने सहमति जताते हुए मामले को 1 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दी।
अनुच्छेद 142 के तहत राहत की मांग
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करने का अनुरोध किया है। यह प्रावधान अदालत को किसी मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश देने की शक्ति प्रदान करता है। कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने इस अधिकार का उपयोग विवादों को व्यापक रूप से समाप्त करने के लिए किया है। अब छात्र आंदोलन से संबंधित FIR के मामले में अदालत इस मांग पर विचार करेगी।
5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़े व्यक्तियों ने 5 सितंबर को इंडिया गेट के आसपास मार्च निकालने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान सरकार द्वारा किए गए वादे पूरे नहीं हुए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में आंदोलन से जुड़े लोगों पर दर्ज FIR को वापस लेना भी शामिल है। इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की नई पहल को इस घटनाक्रम से जोड़ा जा रहा है।
सरकार की पूर्व स्थिति
पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा था कि वह छात्रों और आम नागरिकों को राहत देने के पक्ष में है। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया था कि आंदोलन में शामिल आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने पर सहमति नहीं है। अब केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में नया आवेदन प्रस्तुत किया है। 1 सितंबर की सुनवाई में अदालत के रुख से आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।