सुप्रीम कोर्ट में नीट-यूजी 2026 के छात्रों की याचिका, ओएमआर शीट में गड़बड़ी का आरोप
नीट-यूजी 2026 में ओएमआर शीट विवाद
नई दिल्ली। नीट-यूजी (NEET-UG) के छह छात्रों ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा के दौरान उनकी ओएमआर शीट में दिए गए उत्तर और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा प्रदान की गई ओएमआर शीट में असमानता है। याचिका को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के समक्ष पेश करते हुए काउंसिलिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले मामले की त्वरित सुनवाई की मांग की गई।
वकील की दलीलें
वकील ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ के समक्ष कहा कि यह मामला उन छह छात्रों से संबंधित है, जिन्होंने 600 से 650 अंक के बीच प्राप्त किए हैं। उनका कहना है कि एनटीए द्वारा अपलोड की गई ओएमआर शीट में उनके द्वारा परीक्षा में चिह्नित उत्तरों से भिन्नता है।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए दी सहमति
वकील ने अदालत को बताया कि छात्रों ने इस मुद्दे पर एनटीए को ईमेल भेजे और उनके कार्यालय में भी गए, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद पीठ ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। नीट-यूजी 2026 की परीक्षा पहले 3 मई को आयोजित की गई थी, लेकिन पेपर लीक के कारण इसे रद्द कर दिया गया था। एनटीए ने फिर से परीक्षा 21 जून को आयोजित की।
ओएमआर शीट विवाद का विवरण
नीट-यूजी 2026 परीक्षा के बाद कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि उनकी उत्तर पुस्तिका में भरे गए उत्तर एनटीए द्वारा उपलब्ध कराई गई स्कैन कॉपी से मेल नहीं खाते। छात्रों का कहना है कि कई प्रश्नों के उत्तर गलत तरीके से दर्ज किए गए हैं, जिससे उनके अंक और रैंक प्रभावित हुए हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि ओएमआर शीट में हुई कथित गड़बड़ियों की जांच किए बिना प्रवेश प्रक्रिया आगे बढ़ी, तो उन्हें अपूरणीय नुकसान हो सकता है। दूसरी ओर, एनटीए ने परीक्षा प्रक्रिया और मूल्यांकन प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बताया है। एजेंसी का कहना है कि उम्मीदवारों को उनकी रिकॉर्डेड ओएमआर शीट उपलब्ध कराई जाती है और आपत्तियां दर्ज कराने की व्यवस्था भी होती है।