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सुप्रीम कोर्ट में यूपीआई शुल्क के खिलाफ याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में यूपीआई शुल्क के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई होने जा रही है। केंद्र सरकार ने 2000 रुपए से अधिक के लेनदेन पर 0.40 प्रतिशत शुल्क लगाने का निर्णय लिया है, जो 15 अक्टूबर से लागू होगा। इस निर्णय का देशभर में विरोध हो रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह शुल्क बिना उचित वैधानिक सुरक्षा के लागू किया गया है। जानें इस मामले में क्या हो सकता है आगे।
 

यूपीआई शुल्क पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई


नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा डिजिटल लेनदेन के लिए बनाए गए यूपीआई इकोसिस्टम पर शुल्क लगाने के निर्णय के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होगी। हाल ही में सरकार ने घोषणा की थी कि 2000 रुपए से अधिक के लेनदेन पर 0.40 प्रतिशत शुल्क लागू किया जाएगा, जो 15 अक्टूबर से प्रभावी होगा। इस निर्णय का देशभर में विरोध हो रहा है।


यूपीआई के माध्यम से पिछले छह वर्षों में लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया था। अब, केंद्र सरकार ने 15 अक्टूबर से दुकानदारों के लिए 2000 रुपए से अधिक के भुगतान पर 0.40 प्रतिशत शुल्क लागू करने का निर्णय लिया है, जिसे 75,000 रुपए या उससे अधिक के लेनदेन पर अधिकतम 300 रुपए तक सीमित किया गया है। हालांकि, आम नागरिकों के बीच पर्सन टू पर्सन लेनदेन को पूरी तरह से मुफ्त रखा गया है।


इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच सुनवाई करेगी। यह जनहित याचिका अधिवक्ता रंजन दत्ता द्वारा दायर की गई है, जिसमें 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 अक्टूबर से लागू होने वाले शुल्क को चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह शुल्क बिना किसी उचित वैधानिक सुरक्षा, पारदर्शिता या सार्वजनिक परामर्श के जल्दबाजी में लागू किया गया है। याचिका में 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' की संशोधित धारा 10ए की संवैधानिकता पर भी सवाल उठाए गए हैं।