×

सुप्रीम कोर्ट में यौन उत्पीड़न का मुद्दा: इंदिरा जयसिंह का बयान

सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने न्यायपालिका में यौन उत्पीड़न को एक गंदा रहस्य बताया है। उन्होंने महिला जजों के अनुभवों को साझा किया, जिसमें पुरुष न्यायाधीशों द्वारा यौन दुराचार की घटनाएं शामिल हैं। जयसिंह ने उच्च न्यायालय की पद व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और उम्मीद जताई कि 2047 तक ऐसी घटनाएं समाप्त हो जाएंगी। इस लेख में जानें उनके बयान और न्यायपालिका में महिलाओं की स्थिति के बारे में।
 

इंदिरा जयसिंह का विवादास्पद बयान

सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह के एक बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में यौन उत्पीड़न एक ऐसा गंदा रहस्य है, जिस पर चर्चा नहीं की जाती। उनका दावा है कि कई महिला न्यायाधीशों ने शिकायत की है कि पुरुष न्यायाधीशों ने उनके साथ यौन दुराचार किया है। यह बयान उन्होंने डीएस बोर्कर मेमोरियल लेक्चर के दौरान दिया।


महिला जजों की समस्याएं

इंदिरा जयसिंह ने कहा, 'उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की अपेक्षाएं जिला अदालतों के न्यायाधीशों से होती हैं, जिससे महिला न्यायाधीशों को सबसे अधिक नुकसान होता है। एक महिला न्यायाधीश ने मुझे बताया कि उसे एक न्यायाधीश ने अपनी शादी की 25वीं वर्षगांठ पर बुलाया था और कहा था कि उसे आइटम सॉन्ग पर नृत्य करना है। जब उसने मना किया, तो उसकी नौकरी चली गई।'


ज्यूडीशियरी में यौन उत्पीड़न का गंदा रहस्य

इंदिरा जयसिंह:
'मेरे अनुभव के अनुसार, मैंने कई महिला न्यायाधीशों का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने पुरुष न्यायाधीशों द्वारा यौन उत्पीड़न की घटनाओं का जिक्र किया है। इसलिए मैंने यौन उत्पीड़न पर एक किताब लिखी है, जिसमें मैंने बताया है कि न्यायपालिका में यौन उत्पीड़न एक गंदा रहस्य है, जिस पर कोई बात नहीं करना चाहता।'


महिला जजों की स्थिति पर सवाल

इंदिरा जयसिंह ने उच्च न्यायालय की पद व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'एक महिला न्यायाधीश ने बताया कि जब उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश रिटायर होते हैं, तो एक पार्टी आयोजित की जाती है। इस पार्टी में जिला अदालतों की महिला न्यायाधीशों को उन मेहमानों पर फूल फेंकने के लिए बुलाया जाता है, जो डाइनिंग हॉल की ओर जाते हैं। यह सब उच्च न्यायपालिका में हो रहा है।' उन्होंने आशा व्यक्त की कि 2047 तक ऐसी शर्मनाक घटनाएं समाप्त हो जाएंगी।


एस मुरलीधर का समर्थन

वरिष्ठ वकील एस मुरलीधर ने भी इसी तरह की बातें कीं। उन्होंने कहा कि महिला न्यायाधीशों को वरिष्ठ पुरुष सहयोगियों से यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है और उन्हें अपमानजनक टिप्पणियों को सुनना और सहन करना पड़ता है। इंदिरा जयसिंह ने कहा कि अदालतों में आम लोगों के लिए जो थोड़ा समय बचता है, वह ज्यादातर अमीरों और कंपनियों के मामलों में खर्च हो जाता है।