सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की सुनवाई, एसआईटी के पुनर्गठन का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई
सोमवार को राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में पीठ ने जांच की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाते हुए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) के पुनर्गठन का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि जांच प्रक्रिया जारी है और अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
जांच प्रक्रिया पर अदालत की चिंता
सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने जांच प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी। अदालत ने कहा कि निष्पक्ष और प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के लिए अनुभवी अधिकारियों के नेतृत्व में एसआईटी का पुनर्गठन आवश्यक है। राज्य सरकार को अगली सुनवाई तक इस संबंध में जानकारी देने का निर्देश दिया गया।
केंद्र सरकार ने दी जांच की जानकारी
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मामले की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि जांच लगातार आगे बढ़ रही है और अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच के बाद, मामला संज्ञेय अपराध पाए जाने पर नियमित पुलिस जांच भी जारी है।
राजनीतिक विवाद से बचने की सलाह
सुनवाई के दौरान, अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले को राजनीतिक विवाद का रूप नहीं दिया जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत का उद्देश्य केवल निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय राजनीति का मंच नहीं है और मामले को केवल कानून के दायरे में देखा जाना चाहिए।
एसआईटी के गठन पर चर्चा
पीठ ने सरकार से पूछा कि वर्तमान में जांच कौन कर रहा है और क्या दोबारा एसआईटी गठित की जा सकती है। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वस्त किया कि वरिष्ठ अधिकारियों वाली नई एसआईटी गठित की जाएगी और उसका विवरण रिकॉर्ड पर रखा जाएगा। अदालत ने इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने पर जोर दिया।
अगली सुनवाई की तारीख
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की है। इस दिन उत्तर प्रदेश सरकार को नई एसआईटी के गठन और जांच की प्रगति के बारे में अदालत को अवगत कराना होगा। अदालत ने संकेत दिया कि वह आगे भी जांच की दिशा और पारदर्शिता पर नजर बनाए रखेगी।