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सुप्रीम कोर्ट में राहुल गांधी के पत्र पर CJI सूर्यकांत का स्पष्टीकरण

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के पत्र पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को औपचारिक कानूनी याचिका दायर करनी चाहिए। CJI ने यह भी स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट रिवीजन का मामला पहले से कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर अदालतों के हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जोर दिया। जानें इस महत्वपूर्ण विषय पर और क्या कहा गया।
 

CJI का स्पष्ट बयान

नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विवाद पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा भेजे गए पत्र पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि उन्हें राहुल गांधी का पत्र दो दिन पहले प्राप्त हुआ था, लेकिन विपक्षी नेताओं को ज्ञापन या प्रशासनिक मुलाकात के बजाय औपचारिक कानूनी याचिका दायर करनी चाहिए। CJI ने यह भी कहा कि संविधान के अनुसार अदालत का दरवाजा हर नागरिक के लिए खुला है और किसी भी मामले की सुनवाई कानून के निर्धारित दायरे में ही होगी।


सीजेआई की असमर्थता

मामला पहले से विचाराधीन
सीजेआई ने पत्रकारों से बातचीत में पत्र की गोपनीयता बनाए रखते हुए कहा कि वे इस विषय पर सीधे बैठक करने में असमर्थ हैं। उन्होंने बताया कि वोटर लिस्ट रिवीजन का मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, इसलिए किसी भी पक्ष से न्यायिक प्रक्रिया के बाहर चर्चा नहीं की जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के अनुसार न्यायपालिका सरकार या चुनाव आयोग के दैनिक प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती, लेकिन यदि किसी प्रक्रिया में कानूनी खामी है, तो उसकी समीक्षा न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही की जा सकती है।


सुनवाई की संभावना

मंगलवार को संभावित सुनवाई
सीजेआई ने विपक्षी नेताओं को कानूनी रास्ता अपनाने की सलाह दी और कहा कि यदि उन्हें मतदाता सूची पुनरीक्षण से कोई वास्तविक कानूनी शिकायत है, तो वे एक सामान्य नागरिक की तरह विधिवत याचिका दाखिल कर सकते हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि विपक्ष की ओर से याचिका दायर की जाती है, तो उस पर मंगलवार को सुनवाई संभव है, क्योंकि SIR से संबंधित अन्य याचिकाएं पहले से ही मंगलवार की कार्यसूची में हैं।


संविधानिक अधिकारों का संरक्षण

CJI का मानवाधिकारों पर जोर
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के स्थापना दिवस कार्यक्रम में CJI सूर्यकांत ने संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब भी नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन होता है, तब अदालतों को हस्तक्षेप करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मानवाधिकार आयोगों और निगरानी संस्थाओं से व्यवस्थागत कमियों की पहचान करने और उन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही, जो आमतौर पर अनदेखे रह जाते हैं।