सुप्रीम कोर्ट में वंदे मातरम् मामले पर सुनवाई: केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट में वंदे मातरम् का मामला
वंदे मातरम् मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई: मंगलवार को वंदे मातरम् के सभी छह अंतरों के गायन और इससे जुड़े आपराधिक प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। कर्नाटक के प्रसिद्ध गायक टीएम कृष्णा द्वारा दायर याचिका पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। केंद्र को जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है.
मामले का विवरण
केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने जनवरी 2026 में वंदे मातरम् के गायन के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन दिशा-निर्देशों में वंदे मातरम् के पूरे छह अंतरों के गायन का प्रावधान किया गया था। जब वंदे मातरम् और राष्ट्रगान दोनों प्रस्तुत किए जाएं, तो पहले वंदे मातरम् और उसके बाद राष्ट्रगान गाने की व्यवस्था बताई गई है। पूरे संस्करण की अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड है। इन दिशा-निर्देशों के बाद अगस्त 2026 में एक महत्वपूर्ण कानूनी संशोधन भी हुआ।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट 2026 कानून बन गया। इस संशोधन के तहत वंदे मातरम् को भी उस कानूनी सुरक्षा के दायरे में लाया गया है, जो पहले राष्ट्रगान को प्राप्त थी। इस कानून के अनुसार, राष्ट्रीय गीत के गायन को जानबूझकर रोकना या उसके गायन में बाधा डालना अपराध हो सकता है, जिसके लिए तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
टीएम कृष्णा की चुनौती
टीएम कृष्णा ने सुप्रीम कोर्ट में इस संशोधित कानून और गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों को चुनौती दी है। उनकी याचिका में विशेष रूप से छह अंतरों वाले संस्करण को आधिकारिक रूप से अनिवार्य किए जाने और इसके साथ आपराधिक प्रावधानों को जोड़ने पर सवाल उठाया गया है। याचिका की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एस मुरलीधर ने दलील दी कि जब किसी नियम के उल्लंघन पर आपराधिक कार्रवाई की संभावना हो, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस तरह के व्यवहार को अपराध माना जाएगा।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या केवल गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के आधार पर किसी व्यक्ति पर आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है। याचिका में यह भी कहा गया है कि छह अंतरों में से बाद के अंतरों में हिंदू देवी-देवताओं के संदर्भ आते हैं। कृष्णा का तर्क है कि किसी व्यक्ति की धार्मिक आस्था या अंतरात्मा के खिलाफ उसे इन्हें गाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। यह तर्क संविधान में मिले धार्मिक स्वतंत्रता और अंतरात्मा की स्वतंत्रता के अधिकारों से जोड़ा गया है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतर स्पष्ट किया। अदालत ने संकेत दिया कि राष्ट्रीय गीत क्या होगा और उसके कितने अंतरों को आधिकारिक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा, यह मुख्य रूप से सरकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का विषय है। अदालत इस स्तर पर यह तय नहीं कर रही कि वंदे मातरम् के दो अंतरे आधिकारिक माने जाएं या छह। हालांकि, अदालत ने यह सवाल खुला रखा कि क्या किसी व्यक्ति को उसकी धार्मिक आस्था या वास्तविक अंतरात्मा की आपत्ति के कारण वंदे मातरम् न गाने पर आपराधिक सजा दी जा सकती है। पीठ ने कहा कि इस पहलू पर वह कानून की संवैधानिकता की जांच करेगी।