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सुरेंद्र कोली की संदिग्ध मौत: पीड़ित परिवार ने उठाए सवाल

हरिद्वार में निठारी हत्याकांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की संदिग्ध मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार का मानना है कि कोली की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या है। उन्होंने यह भी बताया कि कोली बच्चों को खिलौनों और फूलों के जरिए फंसाता था। जानें इस मामले की पूरी कहानी और कोली के जीवन के बारे में।
 

सुरेंद्र कोली की मौत की परिस्थितियाँ

हरिद्वार में निठारी हत्याकांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई है। इस घटना पर एक पीड़ित परिवार ने गंभीर सवाल उठाए हैं। नोएडा में एक पीड़िता के पिता ने कहा कि उन्हें लगता है कि कोली की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या है। उनका कहना है कि जेल से रिहा होने के बाद कोली अपने परिवार के साथ शांति से रह सकता था, इसलिए आत्महत्या करने का कोई कारण नहीं था।


पीड़ित पिता की चिंताएँ

पीड़ित पिता ने कहा कि सुरेंद्र कोली चाय की दुकान चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकता था। उनका मानना है कि उसे जानबूझकर मारा गया है। 19 साल जेल में बिताने और फांसी की सजा से बचने के बाद, कोली शुक्रवार को हरिद्वार में लालमाता मंदिर के पास अपनी चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला।


पीड़ित परिवार का बयान

पीड़ित पिता, निठारी केस:-
क्या उसने सच में आत्महत्या की या उसे मार दिया गया? किसी ने उसे मरवाया। जेल से छूटने के बाद वह आत्महत्या क्यों करता? वह अपने बच्चों और बूढ़ी मां के साथ शांति से रह सकता था। उसे मारा गया। उसे क्या चिंता थी? वह तो चाय की दुकान पर काम करके भी अपने परिवार के लिए आसानी से पैसे कमा सकता था। आखिर उसके बच्चे भी तो थे।


एक अन्य सदस्य ने कहा कि जब सुरेंद्र कोली से पूछताछ की गई थी, तो उसने अपने अपराध को स्वीकार किया था। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने कोली से पूछा कि उसने उनकी बेटी को कैसे बहलाया, तो कोली ने माफी मांगते हुए कहा कि यह गलती से हुआ।


बच्चों को फंसाने की कोली की तरकीबें

पीड़ित पिता ने बताया कि कोली बच्चों को खिलौने और फूल दिखाकर अपने पास बुला लेता था। उनका मानना है कि बच्चे ऐसे लालच में आ जाते हैं। वह बड़े लोगों को काम दिलाने के बहाने पैसे का लालच देकर फंसाता था।


पीड़ित पिता, निठारी केस:-
असलियत तो यह है कि अगर आप बच्चों को फूल या खिलौने दिखाएं तो परिवार चाहे कितना भी अमीर क्यों न हो, बच्चे उन्हें लेने के लिए दौड़ पड़ते हैं। वह उन्हें खिलौनों या फूलों का लालच देकर फंसाता था। जहां तक बालिग महिलाओं और पुरुषों की बात है तो वह उन्हें काम का बहाना बनाकर और मनचाहे पैसे का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था।


सुरेंद्र कोली का परिचय

सुरेंद्र कोली को 13 मामलों में से आखिरी मामले में 13 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने बरी किया था, जिसके बाद वह कासना जेल से रिहा हुआ। वह निठारी कांड का मुख्य आरोपी था।


कोली के अपराध

2006 में एक घर के पीछे नाले से कई बच्चों की हड्डियाँ मिली थीं। पुलिस ने कोली और उसके मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को गिरफ्तार किया। कोली पर आरोप था कि वह बच्चों को घर में बुलाकर मार देता था। अदालतों ने उसे 13 मामलों में मौत की सजा सुनाई थी।


कोली का जेल जीवन

सुरेंद्र कोली ने लगभग 19 साल जेल में बिताए। उसने अदालत में कहा कि पुलिस ने जबरदस्ती कबूलनामा लिखवाया और सबूत कमजोर थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने उसे सभी मामलों में बरी कर दिया।


कोली का परिवार

नवंबर 2025 में आखिरी केस में बरी होने के बाद, सुरेंद्र कोली जेल से बाहर आया। उसकी पत्नी ने दूसरी शादी कर ली थी और बेटा जेल जाने के बाद पैदा हुआ था, जिसे उसने कभी नहीं देखा। 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार में लाल माता मंदिर के बाहर अपनी चाय की दुकान में सुरेंद्र कोली फांसी लगाकर मरा मिला।