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सेंट्रल केवाईसी 2.0: वित्तीय सेवाओं में एकीकृत पहचान प्रणाली का आगाज़

सेंट्रल केवाईसी 2.0 प्रणाली का आगाज़ अगस्त से होने जा रहा है, जिससे ग्राहकों को वित्तीय संस्थानों में बार-बार केवाईसी दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। इस नई व्यवस्था के तहत एक साझा ग्राहक पहचान प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे पहचान प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निवेशकों की संख्या में वृद्धि होगी और वित्तीय क्षेत्र पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। जानें इस नई प्रणाली के बारे में और कैसे यह आपके लिए फायदेमंद हो सकती है।
 

नई पहचान प्रणाली का लाभ

नई दिल्ली - वित्तीय सेवाओं का उपयोग करने वाले करोड़ों ग्राहकों के लिए एक राहत भरी सूचना आई है। अगस्त से सेंट्रल नो योर कस्टमर (सीकेवाईसी) 2.0 प्रणाली लागू होने जा रही है। इस प्रणाली के माध्यम से ग्राहकों को विभिन्न वित्तीय संस्थानों में बार-बार केवाईसी दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। नए नियम के तहत हर ग्राहक के लिए एक साझा ग्राहक पहचान (कॉमन कस्टमर आईडी) होगी, जिससे पहचान प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा।


प्रारंभिक चरण में बैंक और बीमा कंपनियां शामिल

इस प्रणाली को पहले चरण में बैंक और बीमा कंपनियों द्वारा अपनाया जाएगा, जबकि म्यूचुअल फंड और ब्रोकरेज कंपनियों के भी इस वर्ष के अंत तक इससे जुड़ने की संभावना है। इस परियोजना पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और बीमा नियामक एक साथ काम कर रहे हैं।


ओटीपी के माध्यम से मिलेगी मंजूरी

ओटीपी से मिलेगी मंजूरी, दोबारा दस्तावेज नहीं देने होंगे


नई व्यवस्था में ग्राहकों की सहमति आवश्यक होगी। यदि किसी व्यक्ति का केवाईसी पहले से केंद्रीय रजिस्ट्री में उपलब्ध है, तो नए बैंक खाते, बीमा पॉलिसी या अन्य वित्तीय उत्पादों के लिए उसे फिर से दस्तावेज जमा नहीं करने होंगे। केवल वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) के माध्यम से ग्राहक की अनुमति लेकर केंद्रीय रजिस्ट्री से केवाईसी विवरण प्राप्त किया जाएगा।


निवेशकों की संख्या में वृद्धि की संभावना

निवेशकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद


एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी डी.पी. सिंह का मानना है कि सीकेवाईसी 2.0 से निवेशकों का दायरा तेजी से बढ़ सकता है। यदि करोड़ों बैंक खाताधारकों में से केवल एक छोटा हिस्सा भी म्यूचुअल फंड जैसे निवेश उत्पादों की ओर बढ़ता है, तो इसका वित्तीय क्षेत्र पर बड़ा सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उनका अनुमान है कि अगले चार महीनों में यह व्यवस्था पूरे उद्योग में लागू हो सकती है।


तकनीकी ढांचे में सुधार

पॉलिसीबाजार के बिजनेस हेड पारस पसरीचा ने कहा कि नई प्रणाली के जरिए रिकॉर्ड लगभग वास्तविक समय (रियल टाइम) में अपडेट किए जा सकेंगे और बीमा कंपनियां इसके लिए आवश्यक तकनीकी ढांचा तैयार कर रही हैं।


पहले की समस्याएं

पहले क्यों होती थी परेशानी?


देश में पहले से केंद्रीय केवाईसी रजिस्ट्री मौजूद है, जिसमें करीब 120 करोड़ ग्राहकों का डेटा दर्ज है। हालांकि, डुप्लीकेट रिकॉर्ड और अधूरी जानकारी जैसी समस्याओं के कारण इसका व्यापक उपयोग नहीं हो पा रहा था। कई मामलों में वित्तीय संस्थान केंद्रीय रजिस्ट्री के रिकॉर्ड स्वीकार नहीं करते थे, जिससे ग्राहकों को हर नए बैंक, बीमा कंपनी या निवेश संस्थान में बार-बार वही दस्तावेज जमा करने पड़ते थे।


विशेषज्ञों का मानना है कि सीकेवाईसी 2.0 लागू होने से केवाईसी प्रक्रिया सरल, तेज और पारदर्शी बनेगी। साथ ही, बैंकिंग के अलावा बीमा, म्यूचुअल फंड और पेंशन योजनाओं में भी लोगों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है।