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सोनम वांगचुक का अनशन: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से हटे, नई शर्तें रखीं

सोनम वांगचुक ने NEET परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन में भूख हड़ताल खत्म करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने तीन नई शर्तें रखी हैं, जिनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग शामिल नहीं है। यह बदलाव राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। जानें उनके द्वारा रखी गई शर्तें और आंदोलन का पूरा घटनाक्रम।
 

नई दिल्ली में चल रहा विरोध प्रदर्शन


नई दिल्ली: हाल ही में NEET परीक्षा के पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली की विफलताओं के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन एक नया मोड़ ले चुका है। प्रसिद्ध पर्यावरणविद और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक, जो पिछले 23 दिनों से भूख हड़ताल पर थे, ने अब अनशन समाप्त करने के संकेत दिए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उनकी नई शर्तों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल नहीं है।


शर्तों में बदलाव

20 जून से शुरू हुए इस आंदोलन में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) और सोनम वांगचुक की प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री का इस्तीफा था। वांगचुक ने कई बार इस मांग को उठाया था। लेकिन 19 जुलाई को अस्पताल में लिखे गए एक नोट ने सबको चौंका दिया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी तीन शर्तों को मान ले, तो वह तुरंत भूख हड़ताल समाप्त कर देंगे। इन शर्तों में इस्तीफे का उल्लेख नहीं होना चर्चा का विषय बन गया है।


सोनम वांगचुक की तीन शर्तें

वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के लिए निम्नलिखित तीन शर्तें रखी हैं:


  • पहली शर्त: केंद्र सरकार हाल ही में हुए पेपर लीक मामलों और शिक्षा प्रणाली की कमियों की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करे।


  • दूसरी शर्त: वांगचुक और CJP के नेतृत्व को संसद तक शांतिपूर्ण पहुंचने की अनुमति दी जाए, जहां सांसद उन्हें आश्वासन दें कि वे शिक्षा के मुद्दों को उठाएंगे।


  • तीसरी शर्त: किसी प्रमुख राजनीतिक पार्टी के नेता अस्पताल में आकर उनसे मुलाकात करें और उनकी मांगों का ठोस आश्वासन दें।


कॉकरोच जनता पार्टी का स्पष्टीकरण

शर्तों में बदलाव को लेकर जब सवाल उठे, तो CJP ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि उनकी मुख्य मांगों में कोई बदलाव नहीं आया है। संगठन ने कहा कि वे पेपर लीक और आत्महत्या के मामलों में शिक्षा मंत्री से जवाबदेही की मांग पर अडिग हैं। इसके साथ ही पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की भी मांग की गई है।


जंतर-मंतर से अस्पताल तक का घटनाक्रम

हाल ही में, सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया। उनके समर्थकों का आरोप है कि उन्हें उनकी इच्छा के खिलाफ हिरासत में रखा गया है। पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह और उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुसार की गई है।