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सोनम वांगचुक की न्यायिक जांच की मांग: लेह पुलिस फायरिंग पर उठे गंभीर सवाल

पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लेह में पिछले साल हुई पुलिस फायरिंग की न्यायिक जांच की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने मुआवजे की राशि को कम बताते हुए इसे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। वांगचुक ने फायरिंग के आदेश देने वाले अधिकारियों से लेकर घायल प्रदर्शनकारियों की स्थिति तक कई गंभीर सवाल उठाए हैं। जानें इस मामले में उनकी चिंताएं और मांगें क्या हैं।
 

सोनम वांगचुक की अपील


नई दिल्ली: पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लेह में पिछले वर्ष हुई पुलिस फायरिंग की न्यायिक जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग को और तेज कर दिया है। उन्होंने रविवार को एक बयान में कहा कि फायरिंग में मारे गए युवाओं के परिवारों को दिया गया मुआवजा अत्यंत कम है और इसे बढ़ाने की आवश्यकता है।


जेल में बिताया समय

वांगचुक ने बताया कि उन्हें 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था और जोधपुर सेंट्रल जेल में भेजा गया था। उनका आरोप है कि उन्हें लगभग छह महीने तक एकांत में रखा गया। बाद में, 14 मार्च 2026 को सरकार ने उनका हिरासत आदेश वापस ले लिया।


उन्होंने 24 सितंबर 2025 को लेह में हुई घटना का उल्लेख किया, जिसमें पुलिस फायरिंग में चार युवाओं की जान गई और कई अन्य घायल हुए। इस मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बीएस चौहान की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग का गठन किया गया था, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है।


सवालों की बौछार

वांगचुक ने कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि फायरिंग का आदेश किस अधिकारी ने दिया, क्या भीड़ को नियंत्रित करने के लिए गोली चलाने से पहले अन्य विकल्पों का उपयोग किया गया था, और सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रदर्शनकारियों को शरीर के संवेदनशील हिस्सों पर ही गोलियां क्यों लगीं। उन्होंने सरकार से मांग की कि जांच रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक किया जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।


मुआवजे की मांग

उन्होंने मृतकों के परिवारों को दिए गए 15 लाख रुपये के मुआवजे पर भी असंतोष व्यक्त किया। वांगचुक ने कहा कि किसी की जान की कीमत पैसे से नहीं लगाई जा सकती, लेकिन मुआवजा सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। उन्होंने मांग की कि मृतकों के परिवारों का मुआवजा बढ़ाया जाए और गंभीर रूप से घायल लोगों को उनकी चोट के अनुसार आर्थिक सहायता दी जाए।


इसके अलावा, उन्होंने सितंबर 2025 के बाद दर्ज आपराधिक मामलों का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, उस समय 87 लोगों पर मामले दर्ज हुए और 81 लोगों को गिरफ्तार किया गया। प्रशासन ने अब तक 20 मामलों को वापस लेने की अनुमति दी है। सोनम वांगचुक ने कहा कि बाकी मामलों की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए। यदि किसी के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं, तो कानून को अपना काम करना चाहिए, लेकिन निर्दोष लोगों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।