सोनम वांगचुक के अनशन के बाद पत्नी की भावुक अपील
नई दिल्ली में भावनात्मक अपील
नई दिल्ली: लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिन के अनशन के बाद अपनी पत्नी गीतांजलि जांगमो ने लोगों से एक भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि पति के खिलाफ राजनीतिक आरोपों और आलोचनाओं को बंद किया जाए और केवल सहानुभूति और समझ दिखाई जाए। इस संदर्भ में गीतांजलि ने एक पोस्ट भी साझा की है।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “सोनम वांगचुक की आलोचना करने से पहले यह सोचें कि उन्होंने 26 दिन तक भूखे रहकर किस बड़े उद्देश्य के लिए संघर्ष किया। आज वे ICU में हैं और अनशन के दौरान उन्होंने 11 किलो वजन घटाया है, जिसमें मांसपेशियों का भी नुकसान हुआ है। कम से कम एक दिन के लिए उन्हें सहानुभूति दें। हर कोई किसी की निस्वार्थ सेवा पर निर्णय नहीं दे सकता।” देखें पोस्ट-
Before you rush to criticise @Wangchuk66, first pause to earn the ethos of fasting for 26 days for a cause larger than yourself.
— Gitanjali J Angmo (@GitanjaliAngmo) July 24, 2026
He lies in the ICU today, having lost 11 kg, including muscle mass, because he chose sacrifice over comfort. The least we can offer him is a day of…
सोनम वांगचुक का आलोचकों को जवाब
सोनम वांगचुक ने भी अपने आलोचकों पर कड़ा प्रहार किया। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि 26 दिन तक भूखे रहने और 11 किलो वजन घटाने के बाद क्या उन्हें अपनी ईमानदारी साबित करने की आवश्यकता है? उन्होंने कहा, “लद्दाख की ठंड से दिल्ली की गर्मी में आकर मैंने यह अनशन किया। क्या मुझे किसी से पूछना पड़ेगा कि मैंने किसके सामने उपवास तोड़ा? ऐसे लोगों पर शर्म आती है जो नकारात्मक सोच रखते हैं।” देखें वीडियो-
AFTER 26 DAYS OF HUNGER DO I NEED TO PROVE MY SINCERITY !!!
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 24, 2026
Do please watch and help spread the word. Find the full 22 minutes video on my YouTube Channel: Sonam Wangchuk pic.twitter.com/6CO3tjZsSD
प्रधान के इस्तीफे की मांग क्यों नहीं?
वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग इसलिए नहीं की क्योंकि उनकी प्राथमिकता प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को रोकना था। उन्होंने बताया कि आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अनशन समाप्त किया। उन्होंने कहा कि आधी रात को उन्हें लिखित आश्वासन मिला था। दिल्ली में स्थिति तनावपूर्ण थी और उन्हें डर था कि पुलिस बड़ी कार्रवाई कर सकती है। उन्होंने 24 सितंबर 2025 की लद्दाख घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि वे नहीं चाहते थे कि यहां भी ऐसा कुछ हो। इसलिए उन्होंने शांति की अपील की।