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सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त करने पर दी सफाई

सोनम वांगचुक ने 26 दिन की भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद अपने फैसले पर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। वांगचुक ने आलोचकों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि उन्हें किसी से कैरेक्टर सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं है। जानें उनके अनशन के पीछे की कहानी और उनकी चिंताएं।
 

सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त करने पर स्पष्टीकरण


सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त करने पर स्पष्टीकरण: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना अनशन समाप्त करने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में वांगचुक पर कई लोगों ने आरोप लगाए हैं। इस पर उन्होंने कहा कि क्या 26 दिन भूखा रहने के बाद मुझे किसी से कैरेक्टर सर्टिफिकेट की आवश्यकता है।


सोनम वांगचुक ने एक वीडियो में स्पष्ट किया कि उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना ही भूख हड़ताल समाप्त की, क्योंकि उनकी प्राथमिकता उन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किसी भी कानूनी कार्रवाई को रोकना थी, जिन्होंने पेपर लीक के खिलाफ 'कॉकरोच जनता पार्टी' के 'संसद चलो' मार्च में भाग लिया था। इस दौरान पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया था।


वांगचुक ने अपने यूट्यूब चैनल और एक्स पर वीडियो साझा कर आलोचकों के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा, "फिजिकली लड़कर हड़ताल के दौरान जो ताकत मेरे अंदर थी, वह मुझे बाहर निकलने पर मजबूर कर गई।" इस वीडियो में उन्होंने कहा, "मैं यह वीडियो दुख और गुस्से के साथ बना रहा हूँ।"


उन्होंने कहा, "26 दिन भूखा रहने के बाद, मेरा 11 किलो वजन कम हो गया है। क्या मुझे किसी से यह साबित करने की आवश्यकता है कि मेरा अनशन कितना पवित्र था?"


AFTER 26 DAYS OF HUNGER DO I NEED TO PROVE MY SINCERITY !!!
Do please watch and help spread the word. Find the full 22 minutes video on my YouTube Channel: Sonam Wangchuk pic.twitter.com/6CO3tjZsSD

— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 24, 2026



वांगचुक ने कहा, "अब मैं तरल भोजन ले रहा हूं, जिससे मुझे थोड़ी ताकत मिली है। मुझे यह सफाई देने में दुख हो रहा है। कई लोग मुझसे सवाल कर रहे हैं कि मैंने अनशन क्यों तोड़ा।"


हालात बिगड़ने का खतरा


सोनम वांगचुक ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों को कोई कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा, "मेरा ध्यान छात्रों की सुरक्षा पर था। मुझे मंत्री के इस्तीफे की कोई आवश्यकता नहीं थी।"


उन्होंने आगे कहा, "मुझे रात 12 बजे बताया गया कि मंत्री लिखित आश्वासन देने को तैयार हैं। मैं चिंतित था कि हालात बिगड़ सकते हैं। मुझे डर था कि कहीं फिर से पुलिस की कार्रवाई न हो।"


उन्होंने अंत में कहा, "मुझे दुख है कि जब मैंने अनशन समाप्त किया, तब मेरे साथी और समर्थक वहां मौजूद नहीं थे।"