सोनम वांगचुक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लोकतंत्र की जीत बताया
सोनम वांगचुक की प्रतिक्रिया
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने इसे लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण जीत के रूप में देखा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने संदेश में कहा कि यह निर्णय शांतिपूर्ण जनआंदोलन, युवाओं की धैर्य और लोकतांत्रिक मूल्यों की शक्ति का परिणाम है। वांगचुक ने यह भी कहा कि जब नागरिक अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाते हैं, तो लोकतंत्र में उनकी आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जनआंदोलन और युवाओं की भूमिका पर जोर
IT'S A VICTORY OF DEMOCRACY
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 25, 2026
direct democracy... straight from the streets.
It's a victory of peace, patience & persévérance.
Congratulations CJP, Gen Z of the nation and thank you all citizens for shedding fear and the fear of fear and rising up from every corner of the nation.… pic.twitter.com/rSLOfvba2R
अपने पोस्ट में वांगचुक ने यह स्पष्ट किया कि यह केवल एक व्यक्ति के इस्तीफे का मामला नहीं है, बल्कि प्रत्यक्ष लोकतंत्र की जीत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि शांति, संयम और निरंतर संघर्ष ने यह संदेश दिया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। उनके अनुसार, देशभर के छात्रों और युवाओं ने अपने अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाकर बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
छात्रों और समर्थकों का जताया आभार
सोनम वांगचुक ने CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) और देशभर के Gen Z छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता की मांग को मजबूती से आगे बढ़ाया। उन्होंने उन नागरिकों का भी आभार व्यक्त किया जिन्होंने आंदोलन का समर्थन किया और बिना किसी डर के अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखी। वांगचुक ने इसे लोकतांत्रिक भागीदारी का सकारात्मक उदाहरण बताया।
अब सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाने की अपील
अपने संदेश के अंत में वांगचुक ने कहा कि जवाबदेही तय होना केवल शुरुआत है, अब शिक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार लागू करने की आवश्यकता है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने और छात्रों का भरोसा बहाल करने की जरूरत पर जोर दिया। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा NEET-UG विवाद और छात्र आंदोलनों की पृष्ठभूमि में आया है। ऐसे में वांगचुक का बयान शिक्षा सुधार की बहस को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है.