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सोनिया गांधी का मोदी सरकार पर हमला: मनरेगा को कमजोर करने का आरोप

कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मोदी सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह योजना गरीबों और बेरोजगारों के लिए एक कानूनी अधिकार है। सोनिया ने 20 साल पहले मनरेगा के पारित होने की याद दिलाते हुए कहा कि यह ग्रामीण भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था। कांग्रेस का 'मनरेगा बचाओ संग्राम' अभियान 10 जनवरी से शुरू होकर 25 फरवरी तक चलेगा, जिसमें पार्टी विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से मनरेगा के महत्व को उजागर करेगी। जानें इस मुद्दे पर सोनिया गांधी के अन्य बयान और कांग्रेस की रणनीति।
 

सोनिया गांधी का गंभीर आरोप


नई दिल्ली: कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के तहत एक वीडियो संदेश में कहा कि वर्तमान सरकार इस कानून को समाप्त करने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, मनरेगा केवल एक योजना नहीं है, बल्कि यह गरीबों, बेरोजगारों और वंचित वर्गों के लिए सम्मानपूर्वक जीवन का कानूनी अधिकार है।


मनरेगा का ऐतिहासिक महत्व

20 साल पहले पारित हुआ था मनरेगा
सोनिया गांधी ने बताया कि लगभग 20 वर्ष पहले, तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में मनरेगा कानून को संसद में सर्वसम्मति से पारित किया गया था। उन्होंने इसे ग्रामीण भारत के लिए एक महत्वपूर्ण और परिवर्तनकारी कदम बताया। इस कानून ने ग्रामीण पलायन को रोका और गांवों में रहने वाले लोगों को काम का अधिकार दिया। इससे गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता मिली और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिली।


गरीबों की अनदेखी का आरोप

गरीबों और बेरोजगारों की अनदेखी का आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने गरीबों, बेरोजगार युवाओं और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के हितों को नजरअंदाज किया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने की कोशिश की गई है, साथ ही इसके मूल स्वरूप को भी नुकसान पहुंचाया गया है। नियमों में बदलाव बिना विपक्ष और राज्यों से संवाद किए किए गए हैं, जिससे रोजगार का अधिकार कमजोर हो रहा है।


दिल्ली से निर्णय लेने की प्रक्रिया

दिल्ली से फैसले, जमीन से दूरी
सोनिया गांधी ने कहा कि अब यह तय करने का अधिकार कि किसे, कितना और कहां काम मिलेगा, स्थानीय जरूरतों के बजाय दिल्ली में बैठी सरकार के हाथ में दे दिया गया है। इससे मनरेगा की आत्मा खत्म हो रही है, क्योंकि यह योजना जमीनी सच्चाइयों और स्थानीय आवश्यकताओं पर आधारित थी।


मनरेगा का महत्व

भूमिहीन किसानों और ग्रामीण मजदूरों पर असर
सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा लाने में कांग्रेस की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, लेकिन यह कभी किसी एक पार्टी की योजना नहीं रही। यह देश और जनता के हित से जुड़ा कानून है। मनरेगा को कमजोर करना करोड़ों गरीबों, भूमिहीन किसानों और ग्रामीण मजदूरों पर हमला है, जिनके लिए यह योजना जीवन रेखा जैसी है।


संघर्ष की घोषणा

संघर्ष जारी रखने का ऐलान
सोनिया गांधी ने स्पष्ट किया कि इस कथित हमले के खिलाफ सामूहिक संघर्ष आवश्यक है। उन्होंने याद दिलाया कि जब मनरेगा लागू किया गया था, तब भी उन्होंने गरीबों को रोजगार का अधिकार दिलाने के लिए संघर्ष किया था। अब वे इस कानून को कमजोर करने के प्रयासों के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।


कांग्रेस का अभियान

कांग्रेस का राष्ट्रव्यापी 'मनरेगा बचाओ संग्राम'
यह वीडियो कांग्रेस के 45 दिवसीय राष्ट्रव्यापी अभियान 'मनरेगा बचाओ संग्राम' का हिस्सा है, जो 10 जनवरी से शुरू होकर 25 फरवरी तक चलेगा। इस अभियान के तहत पार्टी देशभर में शांतिपूर्ण धरने, विधानसभा घेराव, पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम और 'काम मांगो अभियान' चलाएगी। कांग्रेस का उद्देश्य मनरेगा के महत्व को जनता तक पहुंचाना और इसके कथित कमजोर किए जाने का विरोध करना है।


नए कानून की चिंता

नए कानून को लेकर चिंता
कांग्रेस का दावा है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में 'विकसित भारत–ग्रामीण रोजगार और आजीविका मिशन' नाम के नए कानून के जरिए मनरेगा को व्यावहारिक रूप से बदल दिया है। पार्टी का आरोप है कि इस नए ढांचे में रोजगार की गारंटी कमजोर हो जाती है और निर्णय पूरी तरह केंद्र सरकार के विवेक पर छोड़ दिया गया है, जिससे मनरेगा की मूल भावना को ठेस पहुंचती है।