सोनिया गांधी की आत्मकथा में इंदिरा गांधी की हत्या की दर्दनाक यादें
सोनिया गांधी की आत्मकथा का विमोचन
सोनिया गांधी की आत्मकथा 'Belonging: A Journey of Love' 10 नवंबर को प्रकाशित होने जा रही है। इस पुस्तक में उन्होंने 31 अक्टूबर 1984 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के दिन की घटनाओं का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि उस सुबह वह अपने कमरे में थीं और स्नान करने की तैयारी कर रही थीं, तभी उन्हें पटाखों जैसी आवाजें सुनाई दीं। कुछ समय बाद, बच्चों की आया ओंग्मू बाथरूम का दरवाजा पीटते हुए रोने लगीं और बगीचे की ओर इशारा किया।
इंदिरा गांधी की खून से सनी साड़ी
सोनिया गांधी ने लिखा कि वह तुरंत अकबर रोड की ओर दौड़ीं। वहां उन्हें एक सफेद एंबेसडर कार धीरे-धीरे आती दिखाई दी, जिसमें इंदिरा गांधी को ले जाया जा रहा था। सोनिया ने कार के फर्श पर बैठकर उनके सामने पहुंचने की कोशिश की। इंदिरा गांधी की साड़ी और सीने पर खून लगा हुआ था, उनकी आंखें खुली थीं और चेहरे पर हैरानी के भाव थे।
डॉक्टर ने दी इंदिरा गांधी की मौत की सूचना
सोनिया ने बताया कि कई घंटों के इंतजार के बाद उन्होंने डॉक्टर की ओर सवाल भरी नजरों से देखा। डॉक्टर ने सिर हिलाकर इंदिरा गांधी के निधन की पुष्टि की। 31 अक्टूबर 1984 को दोपहर करीब दो बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
राहुल और प्रियंका का सवाल
जब सोनिया घर लौटीं, तो राहुल और प्रियंका रोते हुए उनसे लिपट गए। सुरक्षा कमांडो दोनों बच्चों को स्कूल से घर लेकर आए थे। बच्चे बार-बार पूछ रहे थे कि उनकी मां और दादी कहां हैं और उन्हें सच क्यों नहीं बताया जा रहा।
राजीव गांधी की चिंता
उस समय राजीव गांधी पश्चिम बंगाल में चुनावी रैली कर रहे थे। उन्हें बीबीसी से इंदिरा गांधी के गंभीर रूप से घायल होने की खबर मिली, जिसके बाद वह दिल्ली पहुंचे। सोनिया के अनुसार, राजीव ने उन्हें बताया कि उनसे प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के लिए कहा गया है।
यह सुनकर सोनिया घबरा गईं और राजीव से ऐसा न करने की गुजारिश की, यह जताते हुए कि हमलावर उन्हें भी मार सकते हैं। राजीव ने उत्तर दिया, 'वे मुझे वैसे भी मार देंगे।'
सोनिया ने लिखा कि उसी समय उन्हें एहसास हुआ कि राजीव का रास्ता भी एक दिन इसी तरह के दुखद अंत की ओर जा सकता है। उसी शाम करीब 6:30 बजे राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।