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सोनिया गांधी के मतदाता सूची मामले में नई जांच की संभावना

दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी के मतदाता सूची मामले में मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया है, जिससे नई जांच की संभावना बढ़ गई है। याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि सोनिया का नाम 1983 में भारतीय नागरिक बनने से पहले वोटर लिस्ट में शामिल किया गया था। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट को मामले पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया है। जानें इस मामले की पूरी कहानी और इसके राजनीतिक प्रभाव के बारे में।
 

सोनिया गांधी वोटर लिस्ट केस

सोनिया गांधी का नाम नागरिकता प्राप्त करने से तीन साल पहले मतदाता सूची में शामिल किए जाने के आरोप की जांच फिर से शुरू हो सकती है। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें इस मामले की जांच से इनकार किया गया था।


मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द


दिल्ली कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि यह आदेश बिना ठोस कारण बताए दिया गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामले पर सही तरीके से विचार नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट के आदेश में शिकायत को अधूरा बताया गया था और इसमें कानून की स्पष्ट गलती थी।


मजिस्ट्रेट को भेजा गया मामला


कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि FIR दर्ज करने के बजाय मजिस्ट्रेट का आदेश नागरिकता के मुद्दे से भटक गया। इसके बाद, कोर्ट ने मामले को फिर से मजिस्ट्रेट के पास भेज दिया है, ताकि वे ठोस कारणों के साथ आदेश जारी कर सकें और दलीलों पर फिर से सुनवाई का आदेश दिया है।


1983 से पहले वोटर लिस्ट में नाम का आरोप


यह मामला याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी द्वारा दायर किया गया है। त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में 1983 में भारतीय नागरिक बनने से पहले शामिल किया गया था। उन्होंने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी, जिसे राउज एवेन्यू स्थित एसीजेएम की अदालत ने खारिज कर दिया था। इसी आदेश को पुनरीक्षण याचिका के माध्यम से चुनौती दी गई थी।


भाजपा का आरोप- सोनिया का नाम दो बार जोड़ा गया


पहली बार 1980 में नाम जोड़ा: वोटर लिस्ट में सोनिया का नाम पहली बार 1980 में जोड़ा गया। उस समय वे इटली की नागरिक थीं। गांधी परिवार 1, सफदरजंग रोड पर निवास करता था, जहां प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का सरकारी आवास था। 1 जनवरी 1980 को नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र की वोटर्स लिस्ट में संशोधन हुआ, जिसमें सोनिया गांधी का नाम पोलिंग स्टेशन 145 में क्रम संख्या 388 पर जोड़ा गया।


दूसरी बार 1983 में नाम जोड़ा गया: 1982 में विरोध के बाद उनका नाम लिस्ट से हटा दिया गया था और 1983 में उनका नाम पोलिंग स्टेशन 140 में क्रम संख्या 236 पर फिर से जोड़ दिया गया। समस्या यह थी कि इस संशोधित सूची के लिए योग्यता की तारीख 1 जनवरी 1983 थी, जबकि सोनिया गांधी को भारतीय नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को मिली थी। यानी वोटर लिस्ट में नाम जोड़े जाने के समय वे भारतीय नागरिक नहीं थीं।