सोनिया गांधी ने दिवाली की यादें साझा कीं, इंदिरा गांधी के घर की बातें
दिवाली की यादें
कांग्रेस की प्रमुख नेता सोनिया गांधी ने दिवाली के अवसर पर अपनी सास और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निवास 1 सफदरजंग रोड पर बिताए त्योहार की यादें साझा की हैं। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह अपने घर के बगीचे में अपनी बेटी प्रियंका गांधी और नातिन मिराया वाड्रा के साथ बातचीत करती नजर आ रही हैं.
दीयों की रौनक
सोनिया ने बताया कि दिवाली के समय उनका घर दीयों से जगमगाता था। त्योहार के दौरान कश्मीरी व्यंजन बनते थे। वीडियो के साथ उन्होंने लिखा कि वह दिवाली की प्रारंभिक यादें, परंपराएं और छोटे-छोटे पल फिर से जी रही हैं.
'गणेश जी के पास जलता था पहला दिया'
सोनिया गांधी ने यह भी बताया कि पहले दीये गणेश जी की मूर्ति के पास जलाए जाते थे। उन्होंने कहा कि उस समय रंगीन लाइटें नहीं होती थीं, लेकिन तालाब, छत, बरामदे और रास्तों पर दीयों की सुंदरता अद्भुत होती थी.
'प्रियंका गांधी चांदनी चौक से पटाखे खरीदती थीं'
प्रियंका ने अपने पिता राजीव गांधी के साथ इंदिरा गांधी के सरकारी आवास पर त्योहार मनाने की यादें साझा कीं। उन्होंने कहा कि उनके पिता उन्हें पटाखे खरीदने के लिए चांदनी चौक ले जाते थे। मां-बेटी ने यह भी याद किया कि उस समय मौसम बहुत सुहावना होता था और आसमान साफ दिखता था.
पटाखों और फुलझड़ी की बातें
सोनिया ने प्रियंका की बेटी मिराया से कहा कि उस समय लोग पटाखों के प्रति बहुत उत्साहित रहते थे। उन्होंने विशेष रूप से फुलझड़ी जैसी आतिशबाजी का जिक्र किया। सोनिया की नई किताब 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' चर्चा में है, जो 10 नवंबर को रिलीज होने वाली है.
अतीत के जख्मों को कुरेदती है सोनिया की किताब
द गार्डियन में प्रकाशित किताब के अंश में सोनिया ने 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद के भावनात्मक क्षणों का उल्लेख किया है। इंदिरा गांधी को उनके अंगरक्षकों ने 1 सफदरजंग रोड पर गोली मारी थी, जबकि राजीव गांधी उस समय पश्चिम बंगाल में एक राजनीतिक रैली में थे.
सोनिया गांधी का रिएक्शन जब सुना कि राजीव बनेंगे प्रधानमंत्री
सोनिया ने लिखा कि अस्पताल में राजीव से मिलने के दौरान वह कुछ पल उनके साथ अकेले बिताना चाहती थीं। लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि राजीव कुछ ऐसा कहने वाले हैं, जिसे सुनना वह नहीं चाहती थीं। राजीव ने उनसे कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के लिए कहा गया है। इस पर सोनिया को गहरा गुस्सा और पीड़ा महसूस हुई, क्योंकि उन्हें डर था कि राजीव भी निशाने पर आ सकते हैं.