सोनिया गांधी ने महिला आरक्षण और परिसीमन पर उठाए गंभीर सवाल
महिला आरक्षण और परिसीमन पर संसद में गरमागरमी
संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन का विषय इन दिनों काफी चर्चा में है। केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर विचार करने के लिए तीन दिन का विशेष सत्र आयोजित किया है। इस बीच, कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने आरोप लगाया है कि यह कदम केवल पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनावी लाभ के लिए उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि असली समस्या प्रस्तावित परिसीमन है, जो संविधान पर हमला है। उनका यह भी कहना है कि यदि यह चर्चा मॉनसून सत्र में होती, तो कोई बड़ी समस्या नहीं होती।
सोनिया गांधी का लेख और आरोप
सोनिया गांधी ने एक अंग्रेजी समाचार पत्र में अपने लेख में कहा है कि लोकसभा की सीटों की संख्या में वृद्धि से संबंधित परिसीमन को राजनीतिक दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए। संसद का वर्तमान बजट सत्र 16, 17 और 18 अप्रैल को आयोजित होगा। उन्होंने लिखा, 'प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विपक्षी दलों से उन विधेयकों का समर्थन मांग रहे हैं जिन्हें सरकार विशेष सत्र में पारित करना चाहती है, जबकि चुनाव प्रचार अपने चरम पर है। इस जल्दबाजी का एकमात्र कारण राजनीतिक लाभ है।'
चुनावी रणनीति का आरोप
सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा सच्चाई से दूर रहते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि संसद ने सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सर्वसम्मति से पारित किया था, जो महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर यू-टर्न लेने में 30 महीने क्यों लगे।
सरकार की प्रक्रिया पर सवाल
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों के बीच संसद सत्र का आयोजन एक 'गुप्त रणनीति' है। उन्होंने कहा कि पिछली जनगणना 2021 में होनी थी, लेकिन सरकार ने इसे टाल दिया, जिससे कई लोग अपने अधिकारों से वंचित रह गए। उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन से पहले जनगणना प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।
महिला आरक्षण का असली मुद्दा
सोनिया गांधी ने कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा पहले ही तय हो चुका है, असली समस्या परिसीमन की है। उन्होंने सरकार की प्रक्रिया को अलोकतांत्रिक और खामियों से भरा बताया। उनका कहना है कि यदि सरकार विपक्ष के साथ चर्चा करती है, तो कोई समस्या नहीं होगी।