सोनिया गांधी ने महिला आरक्षण पर सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
महिला आरक्षण और परिसीमन पर सोनिया गांधी की टिप्पणी
सोनिया गांधी ने उठाए गंभीर सवाल
सोनिया गांधी, जो कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख हैं, ने भाजपा सरकार पर महिला आरक्षण के मुद्दे को लेकर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन है। चुनाव प्रचार के दौरान विशेष सत्र की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री विपक्षी दलों से उन बिलों का समर्थन मांग रहे हैं, जिन्हें सरकार संसद में जल्दबाजी में पास कराना चाहती है।
सोनिया ने यह भी बताया कि यह सब तब हो रहा है जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार अपने चरम पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का यह कदम केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए है। 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को संसद में पास किया गया था, लेकिन इसे अगली जनगणना और परिसीमन के बाद लागू करने की शर्त रखी गई है।
संसद में उपस्थित रहने का निर्देश
कांग्रेस, भाजपा और जेडीयू ने विशेष सत्र के लिए व्हिप जारी किया है, जिसमें सभी सांसदों को 16 से 18 अप्रैल तक संसद में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। रविवार को लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी किया गया था, जबकि कांग्रेस और जेडीयू ने सोमवार को अपने व्हिप जारी किए।
सोनिया का प्रधानमंत्री से सवाल
महिला आरक्षण पर सोनिया ने कहा कि राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसे 2024 के चुनाव से लागू करने का सुझाव दिया था, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज किया। अब अनुच्छेद 334-अ में बदलाव कर महिला आरक्षण को 2029 से लागू करने की योजना बनाई जा रही है।
सोनिया ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री को यू-टर्न लेने में 30 महीने क्यों लगे? उन्होंने यह भी पूछा कि 5 राज्यों के चुनाव खत्म होने तक इंतजार क्यों नहीं किया गया। इतनी जल्दीबाजी की क्या आवश्यकता थी, जबकि विपक्ष तीन बार चिट्ठी लिखकर कह चुका है कि पहले 29 अप्रैल को सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।