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सोनीपत में पिटबुल के हमले से छह महीने के बच्चे को गंभीर चोटें

सोनीपत में एक पिटबुल ने छह महीने के बच्चे पर हमला कर दिया, जिससे बच्चे को गंभीर चोटें आईं। घटना के बाद बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका ऑपरेशन किया गया। पड़ोसियों ने पिटबुल के खतरनाक होने की चिंता जताई है। जानें इस घटना के बारे में और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
 

पिटबुल का हमला

सोनीपत। हरियाणा के सोनीपत शहर की सिक्का कालोनी में एक पिटबुल ने छह महीने के बच्चे पर हमला कर दिया। लोगों के प्रयासों के बावजूद, कुत्ता लगभग आधे मिनट तक बच्चे को नोंचता रहा। अंततः, लोगों ने बच्चे को कुत्ते के चंगुल से छुड़ाया। बच्चे को गंभीर चोटें आई हैं, जिसमें मुंह, पेट, हाथ और पैरों पर घाव शामिल हैं।


बच्चे का इलाज

बच्चे को तुरंत नागरिक अस्पताल की आपातकालीन सेवा में ले जाया गया, जहां उसे सीरम, एंटी रेबीज वैक्सीन, टेटनस और अन्य उपचार दिए गए। इसके बाद उसे दिल्ली के शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उसके पेट का ऑपरेशन किया। बच्चे को पेट में 20 टांके लगे हैं।


पड़ोसियों की चिंता

6 महीने के बच्चे को, ये सनकी पिटबुल से नोचवा रहा है।
वीडियो देखो और बताओ किस एंगल से उसे बचा रहा है!
बच्चे की जान जाए तो जाए ये खूँखार आदमखोर को सहलाने में लगा है।@SonipatPolice इसका कुछ इलाज़ करेंगे या फिर आपको भी आलस आ रहा है! pic.twitter.com/KDQyphZ7Cs

— Samar Raj (@SamarRaj_) September 18, 2026


पिटबुल का मालिक

बच्चे के इलाज में साढ़े तीन लाख रुपये खर्च होने के बाद, परिवार ने बच्चे को रोहतक पीजीआई में भर्ती कराया है, जहां उसकी स्थिति स्थिर बनी हुई है। पड़ोसियों ने खतरा जताने पर अपने दोनों पिटबुल को कहीं और छोड़ दिया है। हालांकि, पुलिस में अभी तक इस मामले की कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है।


घटना का विवरण

राकेश, जो हरियाणा शहरी विकास निगम में काम करते हैं, ने बताया कि उनकी बेटी कैलाश अपने छह महीने के बेटे अक्षत को लेकर गली में टहल रही थी। पड़ोस में एक युवक अपने परिवार के साथ रहता है, जिसने दो पिटबुल पाल रखे हैं। जब दरवाजा खोला गया, तभी एक पिटबुल तेजी से बाहर आया और बच्चे पर हमला कर दिया।


बच्चे की स्थिति

कुत्ता बच्चे को जमीन पर गिरा देता है और उसे नोंचने लगता है। कई लोगों ने बच्चे को कुत्ते के चंगुल से निकालने की कोशिश की, लेकिन कुत्ते ने बच्चे के चेहरे, पेट, हाथ और पैरों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। अंततः, एक युवक ने दरवाजा बंद कर कुत्ते को घर में बंद कर दिया, तब जाकर बच्चे की जान बच सकी।


पड़ोसियों की चिंताएं

पड़ोसियों ने खतरनाक पिटबुलों से अपने बच्चों और खुद की जान का खतरा जताया है। इसके चलते, पिटबुल के मालिक ने दोनों कुत्तों को किसी फार्म पर छोड़ दिया है। हालाँकि, ऐसे खतरनाक नस्ल के कुत्तों के पालने पर रोक के बावजूद, आवासीय क्षेत्र में उनकी मौजूदगी पर सवाल उठाए जा रहे हैं।


नागरिक अस्पताल में स्थिति

नागरिक अस्पताल में कुत्तों और बंदरों के काटने के 40 से अधिक मरीज रोजाना आते हैं। इनमें से आधे नए मरीज होते हैं, जबकि आधे पुराने होते हैं। एंटी रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं।


नगर निगम की पहल

सोनीपत नगर निगम के सीएसआई सतपाल सिंह ने बताया कि शहर में घूम रहे आवारा कुत्तों का बंध्याकरण किया जा रहा है। अब तक 10 हजार में से 5300 से अधिक कुत्तों का बंध्याकरण किया जा चुका है।