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सोनौली में ड्रग विभाग और SSB की छापेमारी से दवा कारोबारियों में हड़कंप

सोनौली कस्बे में ड्रग विभाग और SSB की संयुक्त टीम ने मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी की, जिससे दवा कारोबारियों में हड़कंप मच गया। इस कार्रवाई का उद्देश्य नकली और नशीली दवाओं की बिक्री पर रोक लगाना है। जांच के लिए नमूने एकत्र किए गए हैं, और सीमा पार तस्करी के मुद्दे पर भी सवाल उठ रहे हैं। जानें इस अभियान की पूरी जानकारी और इसके प्रभाव के बारे में।
 

सोनौली में छापेमारी का घटनाक्रम

महराजगंज ब्यूरो: भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोनौली कस्बे में बुधवार को ड्रग विभाग और सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 22वीं वाहिनी ने मिलकर मेडिकल स्टोरों पर अचानक छापेमारी की। इस कार्रवाई ने दवा व्यापारियों में हड़कंप मचा दिया। टीम ने कस्बे के कई दवा दुकानों पर जाकर दवाओं की गुणवत्ता और वैधता की जांच की और संदिग्ध दवाओं के नमूने एकत्र किए।


ड्रग इंस्पेक्टर नवीन कुमार के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई में ड्रग विभाग के अधिकारियों के साथ एसएसबी के इंस्पेक्टर और जवान भी शामिल थे। टीम ने मेडिकल स्टोरों में उपलब्ध दवाओं के स्टॉक, बिक्री से संबंधित अभिलेखों और लाइसेंस की जांच की। इसके साथ ही दवाओं की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों की भी गहनता से जांच की गई।


ड्रग इंस्पेक्टर नवीन कुमार ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नकली और नशीली दवाओं की बिक्री पर रोक लगाना है। इसी संदर्भ में मेडिकल स्टोरों से दवाओं के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। उन्होंने दुकानदारों को निर्देश दिया कि प्रतिबंधित श्रेणी की दवाओं की बिक्री केवल चिकित्सक के पर्चे पर ही करें और दवा कारोबार से जुड़े सभी नियमों का पालन करें।


सीमा पार तस्करी पर सवाल


सूत्रों के अनुसार, सोनौली कस्बे से नेपाल में नशीली दवाओं की तस्करी का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या मेडिकल स्टोरों की आड़ में नशीली दवाओं का अवैध कारोबार भी चल रहा है? हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संयुक्त टीम की छापेमारी के बाद अब जांच के लिए लिए गए नमूनों की रिपोर्ट और विभागीय कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।


यह बड़ा सवाल है कि सीमा पार नशीली दवाओं की तस्करी पर रोक लगाने के लिए यह अभियान कितना प्रभावी साबित होगा और इस अवैध कारोबार के पीछे कौन लोग सक्रिय हैं?