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सोरायसिस: त्वचा की गंभीर समस्या और इसके लक्षण

सोरायसिस एक गंभीर ऑटोइम्यून त्वचा रोग है, जो त्वचा पर मोटे लाल चकत्ते और चांदी जैसी पपड़ी का कारण बनता है। यह समस्या अक्सर सामान्य एलर्जी के रूप में नजरअंदाज की जाती है, लेकिन इसके लक्षणों को पहचानना और समय पर इलाज कराना आवश्यक है। जानें सोरायसिस के लक्षण, इसके प्रभाव और इससे बचने के उपाय।
 

नई दिल्ली में सोरायसिस की पहचान

नई दिल्ली: मौसमी बदलाव और प्रदूषण के कारण त्वचा में खुजली, जलन और रैशेज होना आम बात है। कई लोग इसे साधारण एलर्जी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या बिना डॉक्टर की सलाह के क्रीम का उपयोग करते हैं। लेकिन यदि यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे और तेजी से फैलने लगे, तो यह त्वचा की गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी 'सोरायसिस' का संकेत हो सकता है। सोरायसिस एक दीर्घकालिक समस्या है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अत्यधिक सक्रिय होकर त्वचा की कोशिकाओं के तेजी से बनने का कारण बनती है। इसके परिणामस्वरूप मोटी, लाल और चांदी जैसी सफेद पपड़ीदार परतें बन सकती हैं, जो समय पर इलाज न मिलने पर पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती हैं।


सामान्य एलर्जी और सोरायसिस के बीच का अंतर

सामान्य एलर्जी और सोरायसिस में क्या है अंतर?
कैलाश दीपक हॉस्पिटल की कंसलटेंट डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. जैस्मिन के अनुसार, लोग अक्सर एलर्जी, एक्जिमा और सोरायसिस के लक्षणों में भ्रमित हो जाते हैं। सामान्य स्किन एलर्जी किसी एलर्जेन, धूल, रसायन या विशेष चीज के संपर्क में आने से होती है, जिसमें हल्के लाल दाने, खुजली और सूजन होती है। दूसरी ओर, एक्जिमा में आमतौर पर त्वचा में रूखापन और खुजली होती है। इसके विपरीत, सोरायसिस में त्वचा पर गहरे लाल चकत्ते बनते हैं, जिन पर चांदी जैसी सफेद पपड़ी होती है।


सोरायसिस का प्रभाव और स्वास्थ्य जोखिम

जोड़ों, नाखूनों और स्कैल्प पर भी असर, हार्ट के लिए भी जोखिम
डॉक्टरों का कहना है कि सोरायसिस केवल ऊपरी त्वचा तक सीमित नहीं रहता। यह सिर की त्वचा (स्कैल्प), नाखूनों और जोड़ों (जॉइंट्स) को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है, जिसे सोरियाटिक अर्थराइटिस कहा जाता है। सामान्य स्किन एलर्जी में ये अंग प्रभावित नहीं होते। विशेषज्ञों का मानना है कि सोरायसिस का संबंध हृदय संबंधी समस्याओं से भी है। यदि मरीज में कोई संक्रमण हो या वह अत्यधिक मानसिक तनाव से गुजर रहा हो, तो यह बीमारी भड़ककर पूरे शरीर पर फैल सकती है। ऐसी स्थिति में मरीज को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना आवश्यक है।


सोरायसिस के लक्षणों को नियंत्रित करने के उपाय

त्वचा को सूखने से बचाएं और तनाव से बनाएं दूरी
सोरायसिस के लक्षणों को नियंत्रित रखने और इसके फैलाव को रोकने के लिए नियमित देखभाल आवश्यक है। सबसे पहले त्वचा की नमी बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि रूखापन बढ़ने से खुजली और पपड़ी की समस्या और गंभीर हो जाती है। नहाने के तुरंत बाद अच्छी गुणवत्ता वाले मॉइस्चराइजर का उपयोग त्वचा को शांत रखने में मदद करता है। इसके अलावा, मानसिक तनाव सोरायसिस का सबसे बड़ा ट्रिगर माना जाता है। योग, ध्यान और पर्याप्त नींद के जरिए तनाव का स्तर कम रखकर इसके प्रकोप से बचा जा सकता है।


खानपान में सुधार और सावधानियां

खानपान में सुधार और गर्म पानी से परहेज की सलाह
सोरायसिस के मरीजों को अपनी दिनचर्या और खानपान में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। बहुत गर्म पानी से नहाने और त्वचा को जोर से रगड़ने से जलन और रूखापन बढ़ सकता है, इसलिए हमेशा गुनगुने पानी और सौम्य क्लींजर का उपयोग करना चाहिए। साथ ही, आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज और हेल्दी फैट्स शामिल कर शरीर के वजन को नियंत्रित रखना चाहिए। संतुलित जीवनशैली और शुरुआती चरण में विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेकर सोरायसिस को गंभीर रूप लेने से समय रहते रोका जा सकता है।