सौरव दास और आशुतोष रांका की जमानत: क्या है अदालत का नया आदेश?
अदालत में पेशी और आश्वासन
नई दिल्ली में विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत में सौरव दास और आशुतोष रांका ने यह सुनिश्चित किया कि वे भविष्य में किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल नहीं होंगे, जो सार्वजनिक शांति या कानून-व्यवस्था को प्रभावित कर सके। दोनों ने न्यायपालिका और संबंधित न्यायिक संस्थाओं पर अपने विश्वास का भी इजहार किया। अदालत के समक्ष दिए गए लिखित आश्वासन में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की प्रतिबद्धता भी शामिल थी। उन्होंने कहा कि जब तक वहां प्रदर्शन की अनुमति से जुड़ी कानूनी स्थिति में बदलाव नहीं होता, तब तक वे लोगों को एकत्रित करने का आह्वान नहीं करेंगे।
अदालत का निर्णय
अदालत ने इन आश्वासनों और जमानत से संबंधित दस्तावेजों को ध्यान में रखते हुए उनकी आगे की हिरासत को आवश्यक नहीं माना। हालांकि, यह रिहाई मामले के निपटारे का संकेत नहीं है और कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
शांति बनाए रखने का वचन
अदालत में दोनों ने स्पष्ट किया कि वे ऐसी कोई कार्रवाई नहीं करेंगे, जिससे आम लोगों की शांति भंग हो या सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा आए। उन्हें अपने आचरण में सावधानी बरतने और कानून के निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है। जमानत की शर्तों के अनुसार, प्रतिबंध लागू रहने की अवधि में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए आह्वान नहीं किया जाएगा।
मुचलके की शर्तें
सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहाई के लिए 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती मुचलके की शर्तें पूरी करनी पड़ीं। अदालत ने उनके जमानतदारों को अगली सुनवाई के समय उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
कानूनी प्रक्रिया जारी
अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल हिरासत से बाहर आने की अनुमति दी गई है, लेकिन इससे संबंधित मामला समाप्त नहीं हुआ है। जांच अपने निर्धारित कानूनी तरीके से आगे बढ़ेगी। दोनों पक्षों को आगामी सुनवाई में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करनी होगी।
अगली पेशी की तारीख
सौरव दास और आशुतोष रांका को अगली बार 23 अक्टूबर 2026 को दोपहर तीन बजे अदालत में उपस्थित होना है। उनके जमानतदारों को भी निर्धारित कार्यवाही में शामिल रहने के निर्देश दिए गए हैं।