स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर वंदे मातरम् का ऐतिहासिक गायन
लाल किले पर वंदे मातरम् का गायन
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक लाल किले में आयोजित समारोह में पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया गया। इस दौरान सभी छह छंदों का सामूहिक गायन हुआ।
राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में इस भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें लाल किले की प्राचीर पर पुष्प सज्जा के केंद्र में राष्ट्रीय ध्वज और उसके दोनों ओर ‘वंदे मातरम्’ लिखा गया था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशभक्ति के जोश और कड़ी सुरक्षा के बीच लाल किले से 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व किया।
समारोह में उपस्थित अतिथियों के साथ सेना के बैंड ने ‘वंदे मातरम्’ की धुन बजाई और सभी ने इसे गाया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और राष्ट्रगान गाया गया।
अपने 75 मिनट के संबोधन में मोदी ने कहा कि यह हर व्यक्ति के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। आजादी के बाद पहली बार 15 अगस्त को लाल किले से ‘वंदे मातरम्’ की गूंज सुनाई दी है।
उन्होंने कहा, “हर धड़कन ‘वंदे मातरम्’ के जयघोष से गूंज रही है।”
मोदी ने कहा, “आज हर घर तिरंगा है, हर मन तिरंगा है” और देश उत्साह के साथ आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री के लाल किले की प्राचीर पर पहुंचने के बाद सेना के बैंड ने ‘वंदे मातरम्’ की धुन बजाई और उपस्थित अतिथियों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत गाया। इसके बाद राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया।
अतिथियों के लिए जारी कार्यक्रम पुस्तिकाओं में समारोह का विवरण और ‘वंदे मातरम्’ के सभी छंद शामिल थे।
राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने के बाद तिरंगे को ‘राष्ट्रीय सलामी’ दी गई।
इसके बाद भारतीय वायुसेना के दो एमआई-17 हेलीकॉप्टरों ने समारोह स्थल पर पुष्पवर्षा की। एक हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज और दूसरा ‘वंदे मातरम्’ अंकित ध्वज लेकर उड़ान भर रहा था।
‘वंदे मातरम्’ की रचना 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा की गई थी, जो स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति का प्रतीक बन गया। इसे 1950 में भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया।
सरकार ने पिछले नवंबर में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सालभर चलने वाले समारोह की शुरुआत की थी।
‘वंदे मातरम्’ को पहले स्वतंत्र रूप से लिखा गया था और बाद में इसे चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया। इसे पहली बार रवींद्रनाथ टैगोर ने 1896 में कांग्रेस के अधिवेशन में गाया था।
‘वंदे मातरम्’ पहली बार 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ था। बाद में इसे चट्टोपाध्याय ने अपने उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया, जो 1882 में प्रकाशित हुआ।
मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि देश उन महान व्यक्तियों को श्रद्धांजलि देता है, जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।