स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विवाद पर जगद्गुरु रामभद्राचार्य का बयान
प्रयागराज माघ मेले में विवाद बढ़ा
ग्वालियर: प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के अवसर पर स्नान के लिए जा रहे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शोभायात्रा को रोकने का मामला तूल पकड़ रहा है। मेले के प्राधिकरण ने स्वामी को नोटिस जारी कर उनके नाम के आगे 'शंकराचार्य' लिखने पर स्पष्टीकरण मांगा था। इस पर आध्यात्मिक गुरु जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने प्रशासन का समर्थन किया है।
संगम घाट पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अधिकारियों के साथ झड़प के संदर्भ में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने मीडिया से कहा, “स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ अन्याय नहीं हुआ, बल्कि उन्होंने खुद अन्याय किया है। मैं जगद्गुरु हूं, और वह अभी तक जगद्गुरु नहीं बने हैं। यहां के नियमों के अनुसार, कोई भी जुलूस गंगा में नहीं जा सकता। जब पुलिस ने उन्हें रोका, तो उन्हें पैदल संगम तक जाने के लिए कहा गया; यह उनकी अपनी गलती थी।”
नोटिस का जवाब दिया गया
मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 24 घंटे के भीतर जवाब देने के लिए नोटिस भेजा था, जिसमें पूछा गया था कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद उनके नाम के आगे 'शंकराचार्य' क्यों लिखा गया। इसके जवाब में, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के वकील अंजनी कुमार मिश्रा ने प्राधिकरण को एक कानूनी नोटिस भेजा। मिश्रा सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील हैं। इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य लिखने पर रोक के दावे को खारिज किया गया है। 8 पृष्ठों के इस कानूनी नोटिस में प्राधिकरण को अपना पत्र वापस लेने की चेतावनी दी गई है और शंकराचार्य को बदनाम करने का आरोप लगाया गया है।