हज यात्रियों के लिए हवाई किराए में 10,000 रुपये की वृद्धि
हज यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ
इस वर्ष हज यात्रियों को हवाई यात्रा के लिए 10,000 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। सरकार ने बताया कि मध्य पूर्व में चल रहे संकट और एटीएफ की बढ़ती कीमतों के कारण एयरलाइंस ने 400 डॉलर तक की वृद्धि की मांग की थी, लेकिन बातचीत के बाद इसे 100 डॉलर तक सीमित कर दिया गया।
हज एयरफेयर में वृद्धि का कारण
हज कमेटी ऑफ इंडिया ने वैश्विक स्तर पर एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में भारी वृद्धि के चलते इस साल हज यात्रियों के हवाई किराए में 10,000 रुपये की बढ़ोतरी की है। केंद्र सरकार का कहना है कि एयरलाइंस ने 300 से 400 डॉलर प्रति यात्री की अतिरिक्त मांग की थी, लेकिन कड़ी बातचीत के बाद यह बोझ घटाकर केवल 100 डॉलर (लगभग 10,000 रुपये) प्रति यात्री कर दिया गया। विपक्ष ने इस निर्णय को अन्यायपूर्ण बताया है।
15 मई तक जमा करनी होगी राशि
हज कमेटी द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, मध्य पूर्व की स्थिति को देखते हुए वर्ष 2026 के हज एयरफेयर में एक बार का संशोधन किया गया है। इसके तहत हर यात्री को प्रस्थान बिंदु चाहे जो भी हो, अतिरिक्त 100 डॉलर (करीब 10,000 रुपये) देने होंगे। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने बताया कि एयरलाइंस ने एटीएफ की कीमतों में भारी उछाल के चलते 400 डॉलर प्रति यात्री तक की बढ़ोतरी की मांग की थी, जिसे बातचीत के जरिए सीमित किया गया। यह राशि यात्रियों को 15 मई तक जमा करनी होगी।
सपनों को बचाने की कोशिश
अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने X पर लिखा कि हज अनगिनत परिवारों के लिए वर्षों से संजोया गया सपना होता है। उन्होंने कहा, 'हम एयरलाइंस को दोष नहीं दे सकते क्योंकि एटीएफ की कीमतें भू-राजनीतिक तनाव के कारण बढ़ी हैं। एयरलाइंस 300-400 डॉलर की बढ़ोतरी चाहती थी, लेकिन हमारी बातचीत से इसे घटाकर 100 डॉलर कर दिया गया, जिससे हर यात्री की बचत 200-300 डॉलर हुई।' उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय पारदर्शी तरीके से हज 2026 के संचालन को सुचारू बनाने के लिए लिया गया।
विपक्ष ने किया हमला
हज एयरफेयर में बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर हमला बोल दिया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन औवेसी ने इस सर्कुलर को वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि यात्रा से ठीक पहले अतिरिक्त 10,000 रुपये वसूलना पूर्ण अन्याय है। उन्होंने सवाल उठाया, 'जब किराया पहले से तय था तो आखिरी वक्त पर यह वृद्धि क्यों?' विपक्ष का आरोप है कि सरकार हज यात्रियों की धार्मिक भावनाओं का फायदा उठा रही है, जबकि केंद्र इसे संकटकालीन आवश्यक कदम बता रहा है।
सरकार का बचाव
अल्पसंख्यक मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि निजी टूर ऑपरेटर पहले ही किराए में 150 डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी कर चुके थे। मंत्रालय ने कहा, 'हम हर उस यात्री की चिंता को समझते हैं जो वर्षों बचत कर हज पर जाता है। यही वजह है कि हज कमेटी ने उनकी ओर से कड़ा मोलभाव किया। यह किसी प्रकार का शोषण नहीं है, बल्कि सरकार का दबाव अवशोषित कर यात्रियों को बड़े बोझ से बचाने का प्रयास है।' मंत्रालय ने कहा कि सर्कुलर पूरी तरह पारदर्शी है और यह निर्णय एक लाख से अधिक पंजीकृत यात्रियों के हज संचालन को बाधित न करने के लिए उठाया गया है।