×

हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा की कमी से बढ़ रहा खतरा

हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर हजारों लोग अपनी जान को जोखिम में डालकर खतरनाक तरीके से ट्रेन की पटरियों को पार कर रहे हैं। सुरक्षा के अभाव में यह स्थिति गंभीर हो गई है, जिससे किसी बड़े हादसे का खतरा बढ़ गया है। रेलवे अधिकारियों की अनदेखी के चलते लोग जानबूझकर खतरे में पड़ रहे हैं। इस लेख में स्टेशन की स्थिति, लोगों की आदतें और रेलवे की प्रतिक्रिया पर चर्चा की गई है।
 

खतरनाक तरीके से पटरियों को पार कर रहे लोग

हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर हजारों लोग लंबे समय से अपनी जान को जोखिम में डालकर ट्रेन की पटरियों को खतरनाक तरीके से पार कर रहे हैं। प्लेटफॉर्म संख्या 2 से 9 तक दो पक्के रास्ते बनाए गए हैं, जिनसे रोजाना सैकड़ों यात्री और स्टेशन पर काम करने वाले कर्मचारी गुजरते हैं। इन रास्तों पर न तो कोई फुटओवर ब्रिज है और न ही सुरक्षा के कोई उपाय, जिससे ट्रेन की पटरियों को पार करना किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है.


व्यस्त स्टेशन की स्थिति

निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन, जो दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में से एक है, यहां से लगभग 250 ट्रेनें रोजाना दक्षिण और मध्य-पश्चिम भारतीय राज्यों के लिए चलती हैं। लाखों यात्री इस स्टेशन से यात्रा करते हैं। इतनी भीड़-भाड़ वाले स्टेशन पर हर पांच मिनट में एक्सप्रेस, मेल, प्रीमियम और मालवाहक ट्रेनें आती-जाती हैं। इसी दौरान लोग जान जोखिम में डालकर पटरियों को पार कर रहे हैं.


खतरनाक स्थिति का सामना कर रहे लोग

जब एक मीडिया चैनल ने हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन का दौरा किया, तो वहां का दृश्य देखकर यह स्पष्ट हुआ कि लोग अपनी जान को खतरे में डाल रहे हैं। पहला रास्ता प्लेटफॉर्म संख्या 2 से नीचे उतरने के बाद वरिष्ठ अनुभाग इंजीनियर (निर्माण) कार्यालय के पास है, जबकि दूसरा रास्ता लगभग 50 मीटर आगे है. पहले रास्ते से मालवाहक ट्रेनों में सामान लोड करने वाले कर्मचारी सामान ले जाते हुए दिखाई दिए, और ट्रेन आने पर वे रुक जाते हैं.


तेज रफ्तार में गुजरती ट्रेनें

हालांकि, स्टेशन पर अधिकतर ट्रेनों की गति कम होती है, लेकिन कई मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें तेज रफ्तार में हॉर्न बजाते हुए गुजरती हैं। इस दौरान कई यात्री और आसपास के लोग भी पटरियां पार करते हुए नजर आए। यदि वे थोड़ी मेहनत करते, तो पक्के बने प्लेटफॉर्म के फुटओवर ब्रिज का उपयोग कर सकते थे.


आसपास के लोग शार्ट कट का सहारा ले रहे हैं

हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन सराय काले खां गांव और निजामुद्दीन पूर्व कॉलोनी के बीच स्थित है। स्टेशन के पास पुरानी भोगल मार्केट और जंगपुरा हैं। सराय काले खां गांव के निवासियों को भोगल मार्केट जाने के लिए 4 से 5 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में, जो लोग स्टेशन पार कुछ काम करते हैं, वे लंबा रास्ता न लेकर खतरनाक पटरियों को पार करते हैं.


क्या रेलवे अनहोनी का इंतजार कर रहा है?

यदि किसी को स्टेशन की मुख्य एंट्री गेट से उस पार जाना है, तो उसे प्लेटफॉर्म 1 से लेकर प्लेटफॉर्म 9 के बीच सात से आठ पटरियों को पार करना होता है। यह सब रेलवे की नजरों के सामने हो रहा है। लोग जोखिम लेकर पटरियों को पार कर रहे हैं, जबकि रेलवे हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर सुरक्षा उपायों की बजाय किसी अनहोनी का इंतजार कर रहा है.


पटरियों को पार करते हुए हुईं मौतें

भारत में अवैध रूप से ट्रेन की पटरियों को पार करना आम बात है, लेकिन दिल्ली के प्रमुख स्टेशन पर रेलवे अधिकारियों की नजरों के सामने लोग ऐसा कर रहे हैं, यह चौंकाने वाला है। रेलवे के 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, पटरियों को पार करते समय या ट्रेन की चपेट में आने से 31 लोगों की मौत हुई है। इसके बावजूद, निजामुद्दीन स्टेशन पर कोई फुटओवर ब्रिज नहीं बनाया गया है.


रेलवे का बयान

इस मामले में उत्तरी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने कहा कि ट्रेन की पटरियों को खतरनाक तरीके से पार करने की घटनाओं की जानकारी रेलवे सुरक्षा बल को दी गई है। उन्होंने कहा, 'आरपीएफ लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कदम उठाएगी। काले खां गांव के निवासियों के लिए रेलवे ने सब-वे बनाया है, लेकिन कुछ लोग उसका उपयोग नहीं करते हैं।' जनसंपर्क अधिकारी ने आगे कहा कि लोगों को जागरूक किया जाएगा और स्टेशन स्टाफ को उन्हें रोकने के लिए कहा जाएगा.