हरदीप सिंह पुरी की राज्यसभा सदस्यता समाप्त, मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मंत्रियों की कमी
हरदीप सिंह पुरी का कार्यकाल समाप्त
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में एकमात्र सिख मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। उनका राज्यसभा का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। पुरी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सांसद हैं। जब भाजपा ने राज्य की आठ सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की, तो पुरी का नाम सूची में शामिल नहीं था। हालांकि, वे 25 नवंबर के बाद भी छह महीने तक मंत्री बने रह सकते हैं, लेकिन उसके बाद उन्हें इस्तीफा देना होगा। यह ध्यान देने योग्य है कि पंजाब में फरवरी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिससे उनके इस्तीफे की संभावना बढ़ गई है।
इससे पहले, रवनीत सिंह बिट्टू भी एक सिख मंत्री थे, जिन्हें राज्यसभा का दूसरा कार्यकाल नहीं मिला और उन्हें पंजाब विधानसभा चुनाव में भाग लेने के लिए भेजा गया। अब सवाल यह उठता है कि क्या अकाली दल के साथ तालमेल होगा और क्या हरसिमरत कौर बादल सिख मंत्री की कमी को पूरा करेंगी।
इस साल अप्रैल में हुए राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनावों में जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल भी समाप्त हुआ था। वे मोदी सरकार के एकमात्र ईसाई मंत्री थे। केरल में भाजपा ने ईसाई वोटों को लुभाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाई। इसके बाद कुरियन को हटाया गया। इससे पहले केजे अल्फोंस भी मंत्री रह चुके हैं।
पिछली सरकार में एकमात्र मुस्लिम मंत्री एमजे अकबर थे, जिन्होंने 'मी टू' विवाद के कारण इस्तीफा दिया था। इसके बाद से कोई नया मुस्लिम मंत्री नहीं बनाया गया। यदि हरदीप पुरी के इस्तीफे के समय तक कोई नया सिख मंत्री नहीं बनता है, तो मोदी सरकार में देश के तीन प्रमुख अल्पसंख्यक समूहों - मुस्लिम, ईसाई और सिख - का कोई प्रतिनिधित्व नहीं रहेगा। यह भारत की धार्मिक विविधता के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।