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हरविंद्र कल्याण की नेतृत्व क्षमता ने सीपीए सम्मेलन को बनाया ऐतिहासिक

हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण ने हाल ही में आयोजित त्रिदिवसीय राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व और दूरदर्शिता ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। जानें उनके राजनीतिक सफर, कार्यशैली और समाज सेवा के प्रति समर्पण के बारे में।
 

हरियाणा विधानसभा का सफल सम्मेलन

चंडीगढ़ (चंद्र शेखर धरणी)- हाल ही में हरियाणा विधानसभा द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) भारत क्षेत्र जोन-II सम्मेलन की अभूतपूर्व सफलता का श्रेय विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण के नेतृत्व, दूरदर्शिता और मेहनत को जाता है। एक कुशल टीम लीडर के रूप में, उन्होंने आयोजन की हर गतिविधि पर नजर रखी और अधिकारियों तथा टीम के सदस्यों के साथ लगातार संपर्क में रहे। उनके मार्गदर्शन में यह सम्मेलन न केवल सफल रहा, बल्कि हरियाणा विधानसभा की राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा को भी बढ़ाने में सहायक साबित हुआ।


घरौंडा विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर लगातार तीन बार जीत हासिल करने वाले हरविंद्र कल्याण पेशे से इंजीनियर हैं। उन्होंने 1989 में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की और पिछले तीन दशकों से अधिक समय से सार्वजनिक जीवन और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।


हरविंद्र कल्याण का व्यक्तित्व शांत, सौम्य और सहज है। वे आधुनिक कार्यशैली के लिए भी जाने जाते हैं और अपने कार्यों को तकनीकी माध्यमों से प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्थित रखते हैं। उनकी मिलनसारिता और संवाद स्थापित करने की क्षमता उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है।


उनका जन्म 15 जनवरी 1967 को एक राजनीतिक और सामाजिक रूप से सक्रिय परिवार में हुआ। उनके पिता चौधरी देवी सिंह रोड हरियाणा एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन के अध्यक्ष रह चुके हैं, जबकि उनकी माता श्रीमती प्रेम कौर का हाल ही में निधन हुआ।


राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों में भी हरविंद्र कल्याण का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने 2015 से 2019 तक हैफेड के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और 2019 से मार्च 2023 तक लोक लेखा समिति के अध्यक्ष रहे। इसके अलावा, वे भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कोषाध्यक्ष के रूप में भी सक्रिय रहे।


जनसमस्याओं को समझने के लिए, हरविंद्र कल्याण ने 2004 में घरौंडा विधानसभा क्षेत्र के 104 गांवों में लगभग 375 किलोमीटर की पदयात्रा की। इस दौरान उन्होंने गांवों में जाकर लोगों की समस्याओं को समझा और क्षेत्र के विकास के लिए अध्ययन किया।


पारिवारिक जीवन में, उनकी पत्नी रेशमा एक लेखिका हैं, जबकि उनकी पुत्री आयशाना सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय हैं और एक गैर-सरकारी संगठन के माध्यम से ग्रामीण शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के लिए काम कर रही हैं।


हरविंद्र कल्याण की कार्यशैली, संगठनात्मक क्षमता और जनसेवा के प्रति समर्पण ने उन्हें हरियाणा की राजनीति में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। सीपीए सम्मेलन की सफलता ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रभावी नेतृत्व और टीम भावना के बल पर किसी भी आयोजन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।