हरिद्वार में कांवड़ मेले के बाद सफाई अभियान की चुनौती
हरिद्वार में कांवड़ मेले के बाद सफाई की नई चुनौती
हरिद्वार: उत्तराखंड की धार्मिक नगरी हरिद्वार में विश्व प्रसिद्ध कांवड़ मेला समाप्त होने के बाद प्रशासन को एक नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। इस वर्ष लगभग 4 करोड़ 80 लाख शिवभक्त गंगाजल लेकर अपने घरों की ओर लौटे हैं, लेकिन उन्होंने पीछे लगभग 7 हजार मीट्रिक टन कचरे का ढेर छोड़ दिया है। इस विशाल मात्रा में कचरे को साफ करने के लिए नगर निगम ने युद्ध स्तर पर तैयारी की है। इस सफाई अभियान के लिए 1,000 अतिरिक्त कर्मचारियों और 80 से अधिक बड़े वाहनों को तैनात किया गया है।
अंतिम दो दिनों में 2 हजार मीट्रिक टन कचरा निकला
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार, कांवड़ मेले के अंतिम दो दिनों में भीड़ का दबाव इतना अधिक था कि महज 48 घंटों में ही 2 हजार मीट्रिक टन अतिरिक्त कचरा जमा हो गया। इस चुनौती का सामना करने के लिए सभी प्रमुख घाटों, कांवड़ मार्गों, बाजारों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सफाई अभियान को तेज किया गया है। निगम के कर्मचारी दिन-रात कचरा उठाने और उसे शहर के बाहर निर्धारित डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाने में जुटे हैं।
ड्रोन का उपयोग सफाई में पहली बार
सफाई व्यवस्था को बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए हरिद्वार प्रशासन ने तकनीक का उपयोग किया है। पहली बार प्रमुख रास्तों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में कचरे की सटीक लोकेशन जानने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे कंट्रोल रूम को तुरंत पता चलता है कि किस क्षेत्र में सफाई की आवश्यकता है। इसके अलावा, शहर में 'सोलर सेंसर डस्टबिन' का परीक्षण भी चल रहा है, जो कचरा भरने पर अधिकारियों को अलर्ट भेजते हैं। प्रमुख घाटों पर 'स्वच्छता दूत' भी तैनात किए गए हैं, जो लोगों को सफाई के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
अगले 48 घंटों तक सफाई अभियान जारी रहेगा
मेला समाप्त होने के बावजूद सफाई अभियान जारी रहेगा। नगर निगम का यह विशेष महाअभियान अगले दो दिनों तक लगातार चलेगा। इस दौरान शहर की कांवड़ पटरी से लेकर बाजारों तक को पूरी तरह से साफ किया जाएगा। नगर आयुक्त नंदन कुमार ने बताया कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सफाई की रणनीति पहले से तैयार की गई थी। उन्होंने नगर निगम के सभी कर्मचारियों, पर्यावरण मित्रों और वाहन चालकों की मेहनत की सराहना की है। प्रशासन का लक्ष्य हरिद्वार को जल्द से जल्द स्वच्छ और सुंदर बनाना है।