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हरियाणा पुलिस ने किसानों को रोका, खनौरी बॉर्डर पर धरना शुरू

पंजाब से दिल्ली की ओर बढ़ रहे 55 किसानों को हरियाणा पुलिस ने खनौरी-दाता सिंहवाला सीमा पर रोक दिया। किसानों ने प्रशासन के साथ बातचीत की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद उन्होंने स्थायी मोर्चा लगाने का निर्णय लिया। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि यात्रा शांतिपूर्ण होगी और किसानों की मांगें केंद्र सरकार तक पहुंचाई जाएंगी। 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचने का लक्ष्य है। जानें इस आंदोलन की पूरी कहानी और किसानों की स्थिति के बारे में।
 

किसानों का दिल्ली की ओर मार्च रोका गया

अंबाला- पंजाब से दिल्ली की ओर बढ़ रहे 55 किसानों को खनौरी-दाता सिंहवाला सीमा पर हरियाणा पुलिस ने रोक दिया। प्रशासन और किसानों के बीच दो बार बातचीत हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद किसानों ने पंजाब की सीमा में ही स्थायी मोर्चा लगाने का निर्णय लिया और धरने पर बैठ गए।


सुरक्षा के लिए कड़ी व्यवस्था

हरियाणा पुलिस ने बॉर्डर पर बैरिकेडिंग, कंटीली तार, कंक्रीट ब्लॉक और कंटेनर लगाकर रास्ता बंद कर दिया है। सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। किसानों का समूह किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में दिल्ली के लिए रवाना हुआ था।


शुभकरण सिंह की याद में मिट्टी उठाई

शुभकरण सिंह की मौत वाली जगह से उठाई मिट्टी


दिल्ली कूच से पहले किसानों ने 2024 के आंदोलन में जान गंवाने वाले शुभकरण सिंह की मौत वाली जगह से मिट्टी उठाई। किसान नेताओं का कहना है कि यह यात्रा शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य किसानों के मुद्दों को केंद्र सरकार तक पहुंचाना है।


किसानों की मांगें

जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि किसानों का रास्ता हरियाणा पुलिस ने रोका है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट से मामले का संज्ञान लेने की अपील की। डल्लेवाल ने कहा कि सीमित संख्या में किसान दिल्ली जाकर अपनी बात रखना चाहते हैं और इसके लिए पांच प्रतिनिधि पुलिस से बातचीत करेंगे।


उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, किसान पीछे नहीं हटेंगे। डल्लेवाल ने कहा कि किसान किसी टकराव के पक्ष में नहीं हैं और यात्रा पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहेगी। किसानों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध सहित अन्य मुद्दों को केंद्र सरकार के सामने रखने की बात कही है।


29 अगस्त को जंतर-मंतर पहुंचने का लक्ष्य

29 अगस्त को जंतर-मंतर पहुंचने का लक्ष्य


किसान नेताओं के अनुसार, ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ का लक्ष्य 29 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचना है। यात्रा के दौरान एक किसान मुख्य रूप से पैदल चलेगा, जबकि अन्य किसान आवश्यक सामान उठाएंगे। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर पड़ाव किए जाएंगे और जत्था चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेगा।


दिल्ली पहुंचने के बाद एक दिन की किसान पंचायत आयोजित करने की योजना है, जिसके बाद केंद्र सरकार को किसानों की मांगों से संबंधित मांग पत्र सौंपने का प्रयास किया जाएगा।


सरकार से टकराव नहीं चाहते

‘सरकार को टकराव का कोई मौका नहीं देंगे’


जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि किसान सरकार के साथ टकराव नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि जत्था शांतिपूर्ण तरीके से दिल्ली जाने की कोशिश करेगा और अब यह सरकार पर निर्भर है कि वह वहां किस तरह का माहौल बनाती है।


उन्होंने कहा कि जत्थे में सीमित संख्या में किसान हैं। न तो बड़ी भीड़ है और न ही बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियां शामिल हैं। डल्लेवाल ने कहा कि किसान लगातार सरकार के रवैये पर नजर रख रहे हैं और अलग-अलग जगहों पर किसानों के खिलाफ कार्रवाई की खबरें सामने आती रही हैं।


डल्लेवाल ने आरोप लगाया कि जब किसान धरना देते हैं तो सरकार उन्हें बदनाम करने की कोशिश करती है, लेकिन शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने जा रहे किसानों को रोकना उचित नहीं है।


सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी

SP बोले- धारा 163 लागू, आगे जाने की अनुमति नहीं


जींद के SP कुलदीप सिंह भी दाता सिंहवाला बॉर्डर पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था की गई है। किसानों को बताया जाएगा कि इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू हैं, इसलिए उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।


SP के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए अलग-अलग स्थानों पर नाके लगाए गए हैं और बॉर्डर पर पुलिस बल तैनात किया गया है। फिलहाल किसानों के पंजाब की ओर धरने पर बैठने के बाद बॉर्डर पर स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।