हरियाणा में प्रेम विवाह पर विवादित पंचायत का फरमान
सामाजिक पंचायत का सख्त निर्णय
हिसार: हरियाणा के हिसार जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें सामाजिक बंदिशों और खाप संस्कृति का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा गया है। आर्य नगर गांव में आयोजित एक 'सामाजिक पंचायत' ने प्रेम विवाह करने वाले जोड़ों के खिलाफ कठोर और विवादास्पद निर्णय लिया है। पंचायत ने सर्वसम्मति से यह घोषणा की है कि गांव में प्रेम विवाह करने वाले जोड़ों और उनके परिवारों का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा, जिसमें हुक्का-पानी बंद करने का भी आदेश शामिल है। इस तुगलकी फरमान के बाद क्षेत्र में तनाव और चर्चा का माहौल बन गया है।
महापंचायत का आयोजन
3 शादियों के बाद बुलाई गई बैठक
हाल के महीनों में गांव में प्रेम विवाह के तीन अलग-अलग मामले सामने आने के बाद, ग्रामीणों ने पारंपरिक मान्यताओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए रविवार को एक विशाल बैठक बुलाई। इस बैठक में लगभग 1000 लोग शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता कर रहे कुलवंत गोसला ने कहा कि गांव की हर बेटी को पूरे गांव की बेटी माना जाता है, इसलिए एक ही गांव के भीतर शादियों को सामाजिक रीति-रिवाजों के खिलाफ माना जाएगा।
फरमान का पालन सुनिश्चित करने की योजना
कमेटी द्वारा निगरानी
पंचायत ने न केवल बहिष्कार का निर्णय लिया, बल्कि इसे लागू करने के लिए एक ठोस योजना भी बनाई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह नई परंपरा हमारे पुराने सामाजिक ताने-बाने को तोड़ रही है, इसलिए इसे एकजुट होकर चुनौती दी जाएगी। इस फैसले को लागू करने के लिए विशेष कमेटियों का गठन किया गया है, जो संदिग्ध परिवारों पर नजर रखेंगे और घर-घर जाकर चेकिंग करेंगे ताकि कोई भी परिवार ऐसे जोड़ों को समर्थन न दे सके।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
सरपंच का स्पष्टीकरण
जैसे ही यह मामला तूल पकड़ने लगा, प्रशासनिक और कानूनी हलकों में हलचल मच गई। आर्य नगर के सरपंच रतन सिंह ने इस विवाद से ग्राम पंचायत को अलग कर लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के बहिष्कार के फैसले में ग्राम पंचायत की कोई भूमिका नहीं है और यह ग्रामीणों का निजी निर्णय है।
पुलिस की सुरक्षा गारंटी
कानूनी सलाह
तुगलकी फरमान की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया है। हिसार के पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि कानून के दायरे में शादी करने वाले बालिग जोड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। वहीं, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता कमल आनंद ने बताया कि संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने की स्वतंत्रता देता है। पंचायतों के ऐसे फैसले की कोई कानूनी वैधता नहीं है और इसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।