हरियाणा में फसल बीमा योजना में बड़ा घोटाला: मृत किसानों के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी
हरियाणा में फसल बीमा योजना का घोटाला
हरियाणा में फसल बीमा योजना का घोटाला: हरियाणा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें मृत किसानों के नाम पर फसल बीमा योजना में धोखाधड़ी की गई है। यह घोटाला प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से संबंधित है, जिसमें सरकारी अधिकारियों, बीमा एजेंटों और अन्य लोगों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
हिसार की आदमपुर तहसील के गांवों में मृत व्यक्तियों के नाम पर फसल बीमा कराया गया और उनके नुकसान दिखाकर बीमा राशि निकाली गई। कॉमन सर्विस सेंटर, नंबरदार और कृषि विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों ने मिलकर पिछले कई वर्षों में लगभग 3 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम हड़प लिया। यह घोटाला तब उजागर हुआ जब गुड़ुसाल के किसानों को उनके खराब फसलों का बीमा क्लेम नहीं मिला।
घोटाले की कार्यप्रणाली:
चौधरीवाली के एक व्यक्ति का 70 साल पहले निधन हो चुका था, लेकिन उसके नाम पर फर्जी आधार कार्ड बनाकर उसे 32 साल का किसान दिखाया गया। इसके बाद कपास का 2.40 लाख रुपये का बीमा क्लेम किया गया। इसी तरह, भगत सिंह नाम के एक व्यक्ति, जो 12 साल पहले मर चुके थे, के नाम पर भी फर्जी बीमा क्लेम किया गया।
गुड़ुसाल के पूर्व सरपंच नंदलाल ने बताया कि गांव में रेतीली जमीन है, जहां पानी की कमी है, फिर भी आरोपियों ने 400 एकड़ जमीन पर धान की फसल बताकर बीमा क्लेम लिया।
घोटाले का खुलासा कैसे हुआ:
- किसान जब 'मेरी फसल-मेरा ब्यौरा' पोर्टल पर पंजीकरण के लिए जाते हैं, तो संचालक उनकी जानकारी को प्रिंट कर लेते हैं। कई किसान अंतिम तारीख तक नहीं पहुंचते, जिससे उनके नाम पर फर्जी बीमा कराया जाता है।
- मृत व्यक्तियों के नाम पर आधार कार्ड बनाकर फर्जी हलफनामे तैयार किए जाते हैं।
- आरोपी अपना मोबाइल नंबर फॉर्म में भरते हैं, जिससे बीमा क्लेम पास होने पर राशि उनके खातों में पहुंचती है।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया:
पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मामले की जांच शुरू कर दी है। कृषि उप निदेशक राजवीर सिंह ने कहा कि बीमा कंपनी की जिम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसान ने कौन-सी फसल बोई है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य:
यह योजना किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाई गई है, जिसमें कम प्रीमियम पर फसल का बीमा कराया जा सकता है। योजना की शुरुआत 2016 में हुई थी और यह कई प्रकार के जोखिमों को कवर करती है।
कौन कर सकता है आवेदन:
- खुद की भूमि पर खेती करने वाले।
- बटाई पर खेती करने वाले।
- लीज पर जमीन लेकर खेती करने वाले।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:
सांसद कुमारी सैलजा ने इस घोटाले को गंभीर बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।